जम्मू, 30 अप्रैल । जम्मू और श्रीनगर के बीच सीधी रेल सेवा शुरू हो गई है। 20 कोच वाली वंदे भारत एक्सप्रेस के संचालन से यात्रियों की क्षमता ढाई गुना बढ़ गई है, जिससे पर्यटकों, तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को बड़ी सुविधा मिलेगी।
नेताओं ने दिखाई हरी झंडी
इस ट्रेन को उमर अब्दुल्ला, अश्विनी वैष्णव और डॉ. जितेन्द्र सिंह ने जम्मू रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
यात्रा समय और शेड्यूल
पहली ट्रेन (26401) सुबह 6:20 बजे जम्मू तवी से रवाना होकर कटरा, रियासी और बनिहाल होते हुए 11:10 बजे श्रीनगर पहुंचेगी। वापसी ट्रेन (26402) दोपहर 2:00 बजे श्रीनगर से चलकर शाम 6:50 बजे जम्मू पहुंचेगी।
दूसरी सेवा (26404) सुबह 8:00 बजे श्रीनगर से रवाना होकर दोपहर 12:40 बजे जम्मू पहुंचेगी, जबकि वापसी (26403) 1:20 बजे जम्मू से चलकर शाम 6:00 बजे श्रीनगर पहुंचेगी।
ढाई गुनी बढ़ी क्षमता
पहले इन ट्रेनों में 8 कोच होते थे, जिन्हें अब बढ़ाकर 20 कोच कर दिया गया है। इससे यात्रियों को टिकट मिलने में आसानी होगी और भीड़ का दबाव कम होगा।
यात्रा और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा
रेल मंत्री ने कहा कि इस नई रेल सेवा से कश्मीर घाटी में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति आसान होगी और किसानों-व्यापारियों को अपना माल देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
ट्रेन की सुरक्षा के लिए आरपीएफ जवानों के साथ विशेष कमांडो भी तैनात किए गए हैं, जो किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित हैं।
चिनाब और अंजी पुल बने इंजीनियरिंग चमत्कार
इस रूट पर स्थित चिनाब रेल पुल दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे आर्च ब्रिज में से एक है, जिसकी ऊंचाई 359 मीटर है। वहीं अंजी खड्ड रेल पुल देश का पहला केबल-स्टेड रेल पुल है, जो आधुनिक इंजीनियरिंग का उदाहरण है।
यूएसबीआरएल परियोजना का महत्व
उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (यूएसबीआरएल परियोजना) के तहत तैयार इस कॉरिडोर में 36 सुरंगें और 900 से अधिक पुल शामिल हैं। इस परियोजना ने कश्मीर घाटी को पूरे देश से जोड़ने का सपना साकार किया है।
रणनीतिक और आर्थिक महत्व
यह रेल मार्ग न केवल पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि सेना के लिए रसद आपूर्ति और जवानों की आवाजाही को भी तेज, सुरक्षित और आसान बनाएगा। कठिन मौसम या सड़क बाधित होने की स्थिति में यह रेल सेवा एक मजबूत विकल्प साबित होगी।






