नोएडा श्रमिक हिंसा मामला: बिगुल मजदूर दस्ता के दो सदस्य गिरफ्तार, तमिलनाडु कनेक्शन और भड़काने के आरोप

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नोएडा, 20 अप्रैल ।
नोएडा में 13 अप्रैल को हुई श्रमिक हिंसा के मामले में पुलिस ने रविवार देर रात दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनकी गिरफ्तारी इस घटना के मुख्य साजिशकर्ता आदित्य आनंद से हुई पूछताछ के बाद की गई है। दोनों बिगुल मजदूर दस्ता के सक्रिय सदस्य बताए जा रहे हैं।

मास्टरमाइंड से संपर्क में थे आरोपी

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपी 13 अप्रैल को नोएडा में मौजूद थे और घटना के दौरान मास्टरमाइंड आदित्य आनंद के लगातार संपर्क में थे।

थाना फेस-2 क्षेत्र से हुई गिरफ्तारी

पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह के मीडिया प्रभारी विजय कुमार गुप्ता ने बताया कि हिमांशु ठाकुर और सत्यम वर्मा को थाना फेस-2 क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है। हिमांशु ठाकुर उधम सिंह नगर का निवासी है और वर्तमान में दिल्ली के शालीमार गार्डन में रह रहा था, जबकि सत्यम वर्मा लखनऊ का रहने वाला है।

यूट्यूबर हिमांशु की भूमिका संदिग्ध

पुलिस के अनुसार हिमांशु ठाकुर एक यूट्यूबर है और घटना के दिन वह नोएडा में मौजूद था। वह लगातार आदित्य आनंद के संपर्क में था और गतिविधियों में शामिल रहा। दोनों आरोपितों को सोमवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा।

पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां

पुलिस इससे पहले आदित्य आनंद समेत तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। अब इन दोनों की गिरफ्तारी को जांच में अहम कड़ी माना जा रहा है।

आकृति के जरिए संगठन से जुड़ा हिमांशु

जांच में सामने आया है कि हिमांशु ठाकुर एमए के बाद श्रमिकों की समस्याओं पर पीएचडी की तैयारी कर रहा था। वह ‘आकृति’ नाम की युवती के संपर्क में आने के बाद इस संगठन से जुड़ा। पुलिस आकृति को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

तमिलनाडु कनेक्शन और भड़काने के आरोप

अधिकारियों के अनुसार, आकृति ने हिमांशु का संपर्क तमिलनाडु से गिरफ्तार एक लाख के इनामी आदित्य आनंद से कराया था। इसके बाद वह श्रमिक आंदोलनों और जनसभाओं में सक्रिय रहने लगा।

पुलिस का दावा है कि वह वीडियो कॉल के माध्यम से श्रमिकों को भड़काने का काम कर रहा था। मामले में लखनऊ स्थित संगठन के कार्यालय पर भी छापेमारी की गई है।

1000 श्रमिकों को मिली जमानत

इस मामले में शांति भंग की धारा में गिरफ्तार करीब 1000 श्रमिकों को पुलिस ने जेल से रिहा कर दिया है। हालांकि रिहाई के दौरान यह शर्त रखी गई है कि वे दोबारा कोई ऐसा कार्य नहीं करेंगे जिससे सार्वजनिक शांति भंग हो।

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