Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बाबा केदारनाथ के कपाट खुले, चारधाम यात्रा शुरू, हर-हर महादेव से गूंजा धाम

Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

Share

–प्रधानमंत्री के नाम से की गई पहली पूजा

देहरादून। करोड़ों हिन्दुओं के आस्था और विश्वास के प्रतीक बाबा केदारनाथ के कपाट आज वैदिक मंत्रोंच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ खोल दिए गए गए हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से प्रथम पूजा की। कपाट खुलने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की केदारनाथ के प्रति विशेष आस्था है और यही वजह भी है कि उत्तराखंड के चार धाम का तेजी से विकास हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कपाट खुलने पर शुभकामनाएं देने के साथ ही देश-विदेश के आस्थावानों को चारधाम यात्रा का न्योता दिया।

- Sponsored -
Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

बाबा केदार के कपाट खुलने के ऐतिहासिक क्षण में बड़ी संख्या में श्रद्धालु धाम में मौजूद पहुंचे। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित चारधाम यात्रा भी शुरू हो गई है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। प्रशासन ने यात्रा को सुचारु और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की हैं।

इस दौरान आठवीं सिखलाई रेजीमेंट के बैंड की मधुर धुनों और डमरू-वाद्य यंत्रों की गूंज से पूरा धाम शिवमय हो गया। इस अवसर पर बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, पुजारी टी. गंगाधर लिंग, केदारसभा अध्यक्ष राजकुमार तिवारी, बीकेटीसी मुख्य कार्य अधिकारी विशाल मिश्रा, पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर, तीर्थ पुरोहित उमेश पोस्ती, बीकेटीसी सदस्य डॉ. विनीत पोस्ती आदि कपाट खुलने के साक्षी बने।

- Sponsored -
Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

केदारनाथ धाम और मान्यताएं

केदारनाथ धाम को द्वादश ज्योतिर्लिंगों में ग्यारहवें ज्यातिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है। ग्रीष्मकाल के छह माह नर तो शीतकाल के छह माह में देवता भगवान केदारनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं। केदारनाथ धाम उत्तराखंड के चार धामों में से एक और पंच केदार में प्रथम केदार के रूप में पूजा जाता है। शीतकाल में केदारनाथ धाम में बर्फबारी होने के बाद कपाट छह माह के लिये कपाट बंद हो जाते हैं और शीतकालीन पूजा-अर्चना शीतकालीन गददीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में संपंन की जाती है।

- Sponsored -
Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

मेरू-सुमेरू पर्वत की तलहटी के बीच केदार सिंह पर्वत और मंदाकिनी के तट पर भगवान केदारनाथ का भव्य मंदिर विराजमान है। मान्यता है कि द्वापर युग में पांडव गौत्र हत्या की मुक्ति से केदारनाथ धाम आये थे। भगवान शिव ने पांडवों को यहां महिष रूप में दर्शन दिये थे। जिसके बाद यहां पांडवों ने भगवान शिव के केदारनाथ के रूप में ज्योतिर्लिंग की स्थापना की। मंदिर के गर्भ गृह में भगवान शिव का त्रिकोणीय आकार में शिव लिंग स्थित है। यह भी मान्यता है कि यह ज्योतिर्लिंग सतयुग का है और सतयुग में यहां नर-नारायण भगवान केदारनाथ की तपस्या करते थे। केदारनाथ धाम मंदाकिनी नदी का उदगम स्थल भी है। प्रत्येक वर्ष अप्रैल-मई माह में छह माह ग्रीष्मकाल के लिये भगवान केदारनाथ के कपाट आम भक्तों के दर्शनों के लिये खुले रहते हैं। जबकि शीतकाल में दीपावली के बाद भैयादूज के पर्व पर केदारनाथ के कपाट बंद किये जाते हैं।

केदारपुरी के रक्षक भुकुंट भैरव

केदारनाथ धाम में भुकुंट भैरव की भी विशेष मान्यता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार भुकुंट भैरव को केदारपुरी का रक्षक देवता माना जाता है, जो पूरे क्षेत्र की निगरानी करते हैं और धाम की रक्षा करते हैं। मान्यता है कि जब शीतकाल में केदारनाथ धाम के कपाट बंद हो जाते हैं और पूरा क्षेत्र बर्फ से ढक जाता है, तब भी भुकुंट भैरव यहां विराजमान रहते हैं और केदारपुरी की रक्षा करते हैं। इस दौरान भगवान शिव के धाम की सुरक्षा की जिम्मेदारी इन्हीं पर होती है। कपाट खुलने के बाद श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन से पहले या बाद में भुकुंट भैरव के मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि भैरव बाबा के दर्शन किए बिना केदारनाथ यात्रा पूर्ण नहीं मानी जाती। स्थानीय पुजारियों के अनुसार भुकुंट भैरव की कृपा से ही केदारपुरी हर संकट से सुरक्षित रहती है। यही कारण है कि श्रद्धालुओं में इनके प्रति गहरी आस्था देखने को मिलती है।

Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

Share this article

Facebook
Twitter X
WhatsApp
Telegram
 
April 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
27282930