पटना, 22 जुलाई। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को ग्रामीण सड़कों की बदहाली का मुद्दा सदन में उठा। भाजपा विधायक सचिन्द्र प्रसाद सिंह ने ग्रामीण कार्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बड़े पैकेजों में दिए गए टेंडर के कारण कई सड़क परियोजनाएं वर्षों से अधूरी पड़ी हैं और इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
इस पर ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार ने सदन में सरकार की नीति स्पष्ट करते हुए कहा कि अब 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले नए सड़क पैकेजों का टेंडर जारी नहीं किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य अधूरी परियोजनाओं को पूरा करना है।
बड़े पैकेजों से प्रभावित हो रही थीं परियोजनाएं
प्रश्नकाल के दौरान कल्याणपुर विधायक सचिन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा कि राज्य में कई ग्रामीण सड़क योजनाओं की निविदाएं बड़े-बड़े पैकेजों में जारी की गई थीं। इसके बावजूद दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कई योजनाओं में सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत तक ही काम पूरा हो पाया है।
उन्होंने कहा कि बड़े पैकेजों के कारण निर्माण कार्यों की रफ्तार धीमी हुई है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या दो या तीन सड़कों को मिलाकर छोटे पैकेज बनाए जा सकते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर टेंडर जारी हो और काम तेजी से पूरा हो सके।
50 करोड़ से अधिक के नए टेंडर पर रोक
विधायक के सवाल का जवाब देते हुए ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि बड़े पैकेजों को लेकर लगातार शिकायतें और चिंताएं सामने आ रही थीं। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री स्तर पर निर्णय लिया गया है कि ग्रामीण कार्य विभाग अब 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले नए पैकेजों का टेंडर जारी नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे पैकेजों में काम देने से स्थानीय संवेदकों को अवसर मिलेगा और सड़क निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी।
छोटे पैकेजों में जारी हो रहे हैं टेंडर
मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्णय के बाद विभाग ने 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले किसी भी नए पैकेज की निविदा जारी नहीं की है। अब सड़क निर्माण योजनाओं को छोटे-छोटे पैकेजों में बांटकर टेंडर निकाले जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इससे निर्माण कार्यों की निगरानी बेहतर होगी और परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सकेगा।
अधूरी सड़क और पुल-पुलिया योजनाएं होंगी पूरी
सुनील कुमार ने सदन को बताया कि ग्रामीण सड़क योजनाओं के लिए आरआरएसएम योजना के तहत चरणबद्ध तरीके से राशि उपलब्ध कराई जा रही है। जैसे-जैसे फंड मिलेगा, वैसे-वैसे लंबित योजनाओं को पूरा किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिन सड़कों और पुल-पुलियों का शिलान्यास पूर्व मुख्यमंत्री, मंत्री या विधायकों द्वारा किया गया था और बड़े पैकेजों के कारण जिनका निर्माण अधूरा रह गया है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाएगा।
सरकार ने दिया भरोसा
ग्रामीण कार्य मंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा किसी भी विकास योजना को अधूरा छोड़ने की नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि कोई भी ऐसी सड़क या पुल-पुलिया अधूरा नहीं रहेगा, जिसका शिलान्यास जनप्रतिनिधियों द्वारा किया गया है। उपलब्ध संसाधनों के अनुसार सभी लंबित परियोजनाओं को पूरा किया जाएगा।






