बिहार के बाढ़ प्रभावित वैशाली-सारण पहुंचे CM सम्राट चौधरी, राहत शिविरों का लिया जायजा; पीड़ितों से की बातचीत और खुद परोसा भोजन

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पटना, 07 सितंबर। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित वैशाली और सारण जिलों का दौरा किया। उन्होंने हाजीपुर और सोनपुर में संचालित बाढ़ राहत शिविरों का निरीक्षण कर बाढ़ पीड़ितों से सीधे संवाद किया और राहत एवं बचाव कार्यों के साथ उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने राहत शिविरों में संचालित सामुदायिक रसोई में भोजन की व्यवस्था का जायजा लिया और स्वयं लोगों को भोजन परोसा।

हाजीपुर के राहत शिविर में व्यवस्थाओं का लिया जायजा

वैशाली जिले में गंगा ब्रिज थाना के सामने संचालित बाढ़ राहत शिविर में मुख्यमंत्री ने कम्युनिटी किचन का निरीक्षण किया। उन्होंने भोजन वितरण काउंटर और निबंधन-सह-नियंत्रण कक्ष की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। भोजन की गुणवत्ता की जांच करने के साथ उन्होंने शिविर में रह रहे लोगों से भोजन, आवास और अन्य सुविधाओं को लेकर किसी तरह की परेशानी के बारे में पूछा।

शिविर में रह रहे लोगों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बताया कि उन्हें पर्याप्त भोजन मिल रहा है और अन्य व्यवस्थाएं भी संतोषजनक हैं।

आंगनबाड़ी और शैक्षणिक शिविर का भी निरीक्षण

मुख्यमंत्री ने राहत शिविर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया और बच्चों से बातचीत की। उन्होंने शैक्षणिक शिविर में पहुंचकर बच्चों की पढ़ाई, शैक्षणिक गतिविधियों और खान-पान की जानकारी ली। इसके अलावा महिलाओं और पुरुषों के लिए की गई अलग-अलग आवासीय व्यवस्था का भी जायजा लिया।

स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर दिए निर्देश

स्वास्थ्य शिविर के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से जांच और उपचार की उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित किसी भी व्यक्ति के बीमार पड़ने पर उसे तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और इलाज के लिए किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए।

पशुओं के लिए दवा और चारे की व्यवस्था के निर्देश

मुख्यमंत्री ने पशु चिकित्सा शिविर की व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को पशुओं के लिए पर्याप्त दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशु चारे की समुचित व्यवस्था करने का निर्देश दिया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ के पानी में डूबने से हुई मौत के मामलों में मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि भी प्रदान की।

सोनपुर के राहत शिविर में पीड़ितों से की बातचीत

इसके बाद मुख्यमंत्री सारण जिले के सोनपुर पहुंचे। उन्होंने शहर स्थित स्काउट एंड गाइड सेंटर में संचालित बाढ़ राहत शिविर का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने कम्युनिटी किचन की व्यवस्था देखी और शिविर में रह रहे लोगों से बातचीत कर भोजन, आवास, पेयजल सहित अन्य सुविधाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ितों के साथ भोजन भी किया और उसकी गुणवत्ता का जायजा लिया।

शिविर में रह रहे लोगों ने राहत और व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। उन्होंने बताया कि भोजन, पेयजल और रहने समेत आवश्यक सुविधाओं की अच्छी व्यवस्था की गई है।

फसल क्षति का आकलन कर किसानों को मिलेगा मुआवजा

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ से हुई फसल क्षति का आकलन कराया जाएगा और प्रभावित किसानों को समुचित मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि गंगा में हर वर्ष आने वाली बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए भी सरकार प्रयास कर रही है।

गंगा के जलस्तर में 17-18 सेंटीमीटर की गिरावट

हाजीपुर और सोनपुर में राहत शिविरों के निरीक्षण के दौरान पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा नदी के जलस्तर में करीब 17 से 18 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि फरक्का बराज से अभी करीब 15 लाख क्यूसेक पानी का लगातार डिस्चार्ज हो रहा है। अगले दो-तीन दिनों में स्थिति में और सुधार आने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रभावित परिवारों का कराया जाएगा सर्वे

मुख्यमंत्री ने कहा कि फिलहाल आपदा की स्थिति है और ऐसी परिस्थिति में सरकार पूरी तरह जनता के साथ खड़ी है। बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए भोजन, चिकित्सा, बच्चों की पढ़ाई और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। जिला प्रशासन को स्थिति की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि स्थिति सामान्य होने के बाद प्रत्येक प्रभावित परिवार का सर्वे कराया जाएगा। इसके आधार पर नुकसान का आकलन कर प्रभावित लोगों को हरसंभव राहत उपलब्ध कराई जाएगी।

बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए केंद्र से बातचीत

मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा के जल प्रवाह को निर्धारित सीमा में रखने और बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान को लेकर केंद्रीय जल आयोग से भी बातचीत की गई है। सरकार का प्रयास है कि हर वर्ष गंगा में आने वाली बाढ़ से प्रभावित होने वाले लोगों को स्थायी रूप से राहत दिलाई जा सके।

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