20 साल के कार्यकाल के अंत में आखिरी कैबिनेट बैठक, मंत्रियों और अधिकारियों की आंखें हुईं नम
पटना | स्पेशल रिपोर्ट : बिहार की राजनीति के एक लंबे और प्रभावशाली अध्याय का मंगलवार को भावुक समापन हो गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस्तीफे से पहले अपने कार्यकाल की आखिरी कैबिनेट बैठक बुलाई, जो भावनाओं से भरी रही। बैठक के बाद सचिवालय परिसर में जो दृश्य देखने को मिला, उसने सभी को भावुक कर दिया।
आखिरी बैठक में दिखा संतोष और भावुकता
करीब दो दशकों तक बिहार की सत्ता संभालने वाले नीतीश कुमार बैठक के दौरान शांत, संतुष्ट और सहज नजर आए। उनके चेहरे पर एक ओर उपलब्धियों का संतोष था, तो दूसरी ओर विदाई की भावनाएं भी साफ झलक रही थीं।
पोर्टिको में विदाई का भावुक दृश्य
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री जब बाहर निकले, तो पूरा मंत्रिमंडल और वरिष्ठ अधिकारी उन्हें पोर्टिको तक छोड़ने पहुंचे। इस दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया। सभी ने उन्हें उनकी गाड़ी तक विदा किया और अभिवादन किया।
“जहां तक मुझसे हो सका, मैंने किया…”
विदाई के इस क्षण में नीतीश कुमार ने हाथ जोड़कर सभी को संबोधित करते हुए कहा,
“2005 में मैं सरकार में आया… जहां तक मुझसे हो सका, मैंने किया… नई सरकार को मेरा मार्गदर्शन मिलता रहेगा।”
उनके इन शब्दों ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। कई नेताओं और अधिकारियों की आंखें नम हो गईं, हालांकि सभी ने अपनी भावनाओं पर संयम बनाए रखा।
20 साल के कार्यकाल का भावुक अंत
नीतीश कुमार के इस संबोधन के साथ ही बिहार में उनके लगभग 20 वर्षों के शासन का भावुक समापन हो गया। इस दौरान राज्य में विकास, सुशासन और कई बड़े बदलावों के लिए उन्हें जाना जाता है।
नीतीश कुमार की विदाई सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति के एक युग का अंत मानी जा रही है। अब सभी की नजरें नई सरकार के गठन और आगे की दिशा पर टिकी हैं।






