नवादा में तालाब अतिक्रमण पर सख्ती, करोड़ों के अवैध मकान होंगे ध्वस्त: उपमुख्यमंत्री

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पटना। बिहार विधानसभा में शुक्रवार को उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि नवादा जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत सिसवा और समाय गांव में तालाब की जमीन पर कथित अतिक्रमण कर करोड़ों रुपये की लागत से बने पक्के मकानों पर कार्रवाई की जायेगी।

जिले में सिसवा गांव स्थित खाबा तालाब और समय गांव के तालाब की जमीन पर 50 से अधिक लोगों ने स्थायी निर्माण कर लिया है। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि वर्षों से तालाब की जमीन का अतिक्रमण कर पक्के मकान खड़े कर दिए गए, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

सहरसा से इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता ने शुक्रवार को विधानसभा में प्रश्न उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन पर बने गरीबों के झोपड़ियों को तो ध्वस्त कर दिया जाता है, लेकिन नवादा जिले के सिसवा और समाय गांव में तालाब की जमीन पर करोड़ों की लागत से बने पक्के मकानों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की सूची में इन दोनों गांवों के तालाब का उल्लेख नहीं है, जबकि जमीनी हकीकत में अतिक्रमण स्पष्ट रूप से मौजूद है।

विधानसभा में इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बिहार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि आप लिखित शिकायत दें, तो मामले की जांच कर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की नीति अतिक्रमण के विरुद्ध समान रूप से लागू होती है और यदि तालाब की जमीन पर अवैध निर्माण पाया गया तो नियमानुसार उसे हटाया जाएगा। यदि सिसवा के खाबा तालाब और समाय गांव के तालाब की विधिवत मापी कराई जाती है और अतिक्रमण की पुष्टि होती है, तो 60 से 70 तक पक्के मकानों पर कार्रवाई हो सकती है। इनमें से कई मकान करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित बताए जा रहे हैं।

विधानसभा में उठे इस मुद्दे के बाद दोनों गांवों में कब्जाधारियों के बीच हड़कंप की स्थिति है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन सख्ती से मापी और जांच करता है, तो बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई संभव है। वहीं कुछ ग्रामीणों का दावा है कि निर्माण वर्षों पुराना है और कई मामलों में स्थानीय स्तर पर मौन सहमति भी रही है। इस अतिक्रमण को हटाने के लिए सिसवा गांव के ब्यास देव सिंह ने हाईकोर्ट में रिट याचिका भी दायर की है ।उन्होंने भी जिला प्रशासन पर अतिक्रमणकारियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।

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