नई दिल्ली/रायपुर: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सरायपाली क्षेत्र स्थित बलौदा बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में वैज्ञानिक अन्वेषण के दौरान उच्च गुणवत्ता वाले हीरों की खोज ने देश के खनिज क्षेत्र में नई उम्मीद जगाई है। प्रारंभिक जांच में यहां से पांच हीरे प्राप्त हुए हैं, जिनका कुल वजन करीब 1.22 कैरेट है।
संयुक्त प्रयास से मिली सफलता
राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) और छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (सीएमडीसी) की संयुक्त कंपनी एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड ने इस खोज की पुष्टि की है। कंपनी के अनुसार, करीब 200 टन खनिज सामग्री की प्रोसेसिंग के बाद ये हीरे मिले हैं।
जेम क्वालिटी हीरों की मौजूदगी
मिले पांच हीरों में दो जेम क्वालिटी के सफेद हीरे शामिल हैं, जिनका वजन 0.19 और 0.06 कैरेट है। इसके अलावा एक पीले रंग का 0.32 कैरेट और दो भूरे रंग के हीरे (0.59 और 0.06 कैरेट) भी प्राप्त हुए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जेम क्वालिटी हीरे उच्च पारदर्शिता, बेहतर रंग और चमक के कारण बेहद मूल्यवान होते हैं और मुख्यतः आभूषण निर्माण में उपयोग किए जाते हैं।
वैज्ञानिक प्रक्रिया से हुई पहचान
इस क्षेत्र की पहचान स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, जियोफिजिकल सर्वे और लगभग 500 मीटर गहरी ड्रिलिंग के आधार पर की गई थी। इसके बाद नमूनों को मध्यप्रदेश के पन्ना स्थित डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट भेजा गया, जहां परीक्षण के दौरान हीरों की पुष्टि हुई।
आगे बड़े भंडार की संभावना
खनिज विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती चरण में जेम क्वालिटी हीरों का मिलना बेहद सकारात्मक संकेत है। इससे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हीरा भंडार होने की संभावना मजबूत हुई है और भविष्य में विस्तृत सर्वेक्षण तथा व्यावसायिक खनन का रास्ता खुल सकता है।

आर्थिक विकास को मिलेगी गति
भारत वर्तमान में कच्चे हीरों के लिए आयात पर निर्भर है, जबकि कटिंग और पॉलिशिंग में विश्व में अग्रणी है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में हीरे की खोज ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को मजबूती दे सकती है। व्यावसायिक खनन शुरू होने पर राज्य में निवेश, रोजगार और राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने जताई खुशी
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि को राज्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह खोज छत्तीसगढ़ की समृद्ध खनिज संपदा को दर्शाती है और विकास के नए अवसर पैदा करेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही अभी हीरों की संख्या कम है, लेकिन भू-वैज्ञानिक दृष्टि से यह खोज अत्यंत महत्वपूर्ण है और भविष्य में भारत को एक नए हीरा उत्पादक क्षेत्र के रूप में स्थापित कर सकती है।






