लखनऊ, 30 अप्रैल — उत्तर प्रदेश विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में Nari Shakti Vandan Adhiniyam का विरोध करने वालों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। पूरे दिन चली कार्यवाही में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath और नेता प्रतिपक्ष Mata Prasad Pandey समेत कुल 33 सदस्यों ने भाग लिया।
सत्र में दिनभर चली चर्चा
महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर बुलाए गए इस विशेष सत्र की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होकर शाम करीब साढ़े पांच बजे तक चली। इस दौरान सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर तीखे प्रहार करते हुए उन्हें महिला सशक्तिकरण का विरोधी बताया।
सुरेश खन्ना ने पेश किया प्रस्ताव
राज्य के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री Suresh Khanna ने लोकसभा में अधिनियम का विरोध करने वालों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार राजनीति में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और जब तक महिलाओं को नीति निर्धारण में उचित अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक विरोधियों की निंदा जारी रहेगी।
विपक्ष ने किया विरोध
सदन में प्रस्ताव आने के बाद नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने इसका विरोध किया और इसे अनुचित बताया। हालांकि, सदन में सत्ता पक्ष के बहुमत के चलते प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित हो गया।
मुख्यमंत्री ने किया प्रस्ताव का समर्थन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए Narendra Modi का आभार जताया और कहा कि वर्ष 2023 में इस अधिनियम को पारित कर महिलाओं को उनका अधिकार देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया। उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि संसद में इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव में बाधा डालकर उन्होंने महिला सशक्तिकरण के खिलाफ काम किया।
विपक्ष पर तीखे हमले
मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके आचरण से महिलाओं के प्रति उनकी सोच स्पष्ट होती है। उन्होंने कई पुराने मामलों का जिक्र करते हुए विपक्ष की आलोचना की और कहा कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
महिला भागीदारी बढ़ाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में संसद और विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी सीमित है, जिसे बढ़ाने के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण जरूरी है। उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं को उनके अधिकारों के अनुरूप प्रतिनिधित्व मिल सकेगा।
सदन के बाहर भी दिखा विरोध-समर्थन
सत्र शुरू होने से पहले समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के पास धरना दिया, जबकि सत्ता पक्ष की महिला विधायकों के नेतृत्व में भाजपा के विधायक और मंत्री पैदल मार्च करते हुए सदन पहुंचे और अधिनियम के समर्थन में नारे लगाए।






