रांची: झारखंड सरकार ने वर्ष 2029 तक राज्य को टीबी (क्षय रोग) मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। रांची में आयोजित नेशनल टास्क फोर्स की बैठक में देश के 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और टीबी उन्मूलन की रणनीतियों पर चर्चा की।
बैठक को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार ने कहा कि दुनिया के लगभग 25 प्रतिशत टीबी मरीज भारत में हैं, इसलिए केंद्र सरकार का सबसे अधिक फोकस टीबी उन्मूलन पर है। उन्होंने कहा कि टीबी एक पूरी तरह से इलाज योग्य बीमारी है और इसके उपचार के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नागरिकों का स्वस्थ होना बेहद जरूरी है।
अजय कुमार ने बताया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में कार्यरत कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) और मेडिकल कॉलेज टीबी उन्मूलन अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मरीजों की बेहतर पहचान और निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग AI आधारित डेटा सिस्टम विकसित करने की तैयारी कर रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप राज्यभर में लगातार टीबी उन्मूलन अभियान चलाया जा रहा है। पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित कर बड़े पैमाने पर टीबी स्क्रीनिंग की जा रही है, ताकि शुरुआती चरण में ही मरीजों की पहचान हो सके।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार टीबी मरीजों को हर महीने 1,000 रुपये की सहायता राशि भी उपलब्ध करा रही है। वर्तमान में झारखंड में करीब 6 हजार टीबी मरीज चिन्हित हैं। उन्होंने कहा कि टीबी के साथ-साथ कुष्ठ रोग, मलेरिया और थैलेसीमिया जैसी बीमारियों के खिलाफ भी अभियान को और तेज किया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पहली बार किसी डॉक्टर को झारखंड का स्वास्थ्य मंत्री बनने का अवसर मिला है और वे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में रिम्स-2 परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, जो भविष्य में एशिया के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में शामिल हो सकता है।
सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2029 तक झारखंड को पूरी तरह टीबी मुक्त राज्य बनाया जाए और इसके लिए सभी स्तरों पर समन्वित प्रयास जारी हैं।






