पटना : बिहार में अपराध की स्थिति को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताज़ा रिपोर्ट में राज्य में जघन्य अपराधों और किशोर अपराध के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार हत्या, लूट, डकैती और अन्य हिंसक घटनाओं में इजाफा हुआ है, जिससे कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है।
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि किशोर अपराध के मामलों में बिहार देश के शीर्ष राज्यों में शामिल हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024 में नाबालिगों द्वारा किए गए अपराधों के हजारों मामले दर्ज हुए, जो पिछले वर्षों की तुलना में अधिक हैं। चोरी, मारपीट, हथियारबंद वारदात और गंभीर अपराधों में किशोरों की संलिप्तता बढ़ने को सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती माना जा रहा है।
हालांकि राज्य सरकार का दावा है कि बिहार की कुल अपराध दर राष्ट्रीय औसत से कम है, लेकिन जघन्य अपराधों में बढ़ोतरी ने सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। NCRB के आंकड़े सामने आने के बाद विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का नया मुद्दा मिल गया है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह कमजोर हो चुकी है और अपराधियों में पुलिस का डर खत्म हो गया है।
राजनीतिक गलियारों में भी इस रिपोर्ट को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेरोजगारी, सामाजिक असंतुलन और कमजोर निगरानी तंत्र किशोर अपराध बढ़ने की बड़ी वजह हो सकते हैं। अब निगाहें राज्य सरकार की अगली रणनीति और पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।






