JTET भाषा विवाद पर झारखंड मंत्रालय में हाई लेवल बैठक, भोजपुरी-मगही-अंगिका पर मंथन, 22 मई को फिर होगी समीक्षा

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रांची। झारखंड में JTET भाषा विवाद को लेकर सियासी और शैक्षणिक हलचल तेज हो गई है। भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को JTET नियमावली में शामिल करने की मांग को लेकर छात्रों और अभ्यर्थियों का विरोध लगातार बढ़ रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। समिति की पहली महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को प्रोजेक्ट भवन स्थित झारखंड मंत्रालय में शुरू हुई। इस बैठक पर हजारों अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हुई हैं।

छात्रों का विरोध लगातार तेज

राज्यभर के अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को JTET नियमावली में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि इन भाषाओं को मान्यता नहीं मिलने से बड़ी संख्या में उम्मीदवार परीक्षा प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं।

विशेषकर पलामू प्रमंडल समेत कई क्षेत्रों के छात्रों का कहना है कि वहां बड़ी संख्या में लोग भोजपुरी, मगही और अंगिका बोलते हैं। ऐसे में इन भाषाओं को नियमावली से बाहर रखना क्षेत्रीय अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा।

उच्चस्तरीय समिति की बैठक में मंथन

भाषा विवाद को लेकर गठित समिति की बैठक की अध्यक्षता राधाकृष्ण किशोर कर रहे हैं। बैठक में दीपिका पांडे सिंह, शिल्पी नेहा तिर्की सहित कई विभागीय अधिकारी शामिल हुए। सरकार इस मुद्दे पर व्यापक स्तर पर चर्चा कर रही है।

किन मुद्दों पर हो रही चर्चा

सूत्रों के अनुसार, बैठक में यह आकलन किया जा रहा है कि वर्तमान भाषा नियमावली से कितने अभ्यर्थी प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही किन भाषाओं को JTET नियमावली में शामिल किया जाए और इसके लिए नियमों में क्या बदलाव आवश्यक होंगे, इस पर भी विचार किया जा रहा है।

दूसरी बैठक शुक्रवार को

बैठक के बाद मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि सभी विभागों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को समिति की दूसरी बैठक आयोजित होगी, जिसके बाद आगे की रणनीति और संभावित फैसले पर विचार किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों और राज्यहित दोनों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेगी।

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