रांची, 21 अगस्त । जेपीएससी की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट की रोक के बाद छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले का सम्मान है, लेकिन छात्रों की जिन मांगों को लेकर आंदोलन किया गया था, उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
सरकार की भूमिका पर उठाए सवाल
शुक्रवार को प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल की मौजूदगी नहीं होना और सीआईडी की जांच रिपोर्ट को प्रभावी तरीके से पेश नहीं किया जाना कई सवाल खड़े करता है। इन परिस्थितियों से छात्रों के बीच सरकार की भूमिका और मंशा को लेकर संदेह बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि सरकार के रवैये के खिलाफ आने वाले समय में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। यदि छात्रों की मांगों को नजरअंदाज किया गया या मामले को दबाने की कोशिश हुई, तो छात्र एक बार फिर सड़क पर उतर सकते हैं।
16 दिनों तक चला था अनशन
महतो ने बताया कि आंदोलन के दौरान छात्रों ने 16 दिनों तक अनशन किया था। इसके बावजूद कई सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं मिले। अब छात्रों की नजर हाईकोर्ट की आगे की कार्रवाई और राज्य सरकार के अगले कदम पर है।
उन्होंने कहा कि यदि न्याय की उम्मीद पूरी नहीं हुई, तो आंदोलन का रास्ता दोबारा अपनाया जा सकता है।
योग्य अभ्यर्थियों की नौकरी छीनना मकसद नहीं
देवेंद्रनाथ महतो ने स्पष्ट किया कि छात्रों का आंदोलन किसी योग्य और सफल अभ्यर्थी की नौकरी छीनने के लिए नहीं है। छात्रों की मुख्य चिंता भर्ती प्रक्रिया में कथित पेपर लीक, धांधली, गड़बड़ी और पारदर्शिता की कमी को लेकर है।
उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के साथ किसी तरह का अन्याय न हो। छात्रों की मांग निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने की है।






