नई दिल्ली। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने भारत मंडपम में युवा कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन मामले में लगाए गए आपराधिक प्रावधानों को कानून का असमान और अनुचित इस्तेमाल बताया है। उन्होंने कहा कि यह एक राजनीतिक विरोध था, जिसे गलत तरीके से संगठित हिंसा और आपराधिक साजिश के रूप में पेश किया जा रहा है। भारत मंडपम सार्वजनिक स्थल है, यहां विरोध को अपराध बनाना गलत है।
सिंघवी ने गुरुवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि इस मामले में ऐसा कोई तत्व नहीं है, जिसे किसी भी तरह से संगठित हिंसा, दुर्भावनापूर्ण इरादा या पूर्व नियोजित अपराध कहा जा सके। उन्होंने कहा कि यह कानून का असमान, अनुचित और गलत इस्तेमाल है। उन्होंने कहा कि भारत मंडपम कोई निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि एक सार्वजनिक स्थान है। इसकी तुलना किसी के घर से नहीं की जा सकती। क्या विरोध करने वाले लोग अपने घरों के भीतर विरोध करें या केवल सरकार द्वारा तय किए गए तरीके से ही विरोध करें।
सिंघवी ने कहा कि सरकार से जवाब मांगना आतंकवाद नहीं होता। विरोध के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं। विरोध के दौरान टी-शर्ट उतारना या न उतारना अलग-अलग मत का विषय हो सकता है, लेकिन इसे आपराधिक कानून का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता। उन्होंने इस मामले में लगाए गए विभिन्न प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि चोट पहुंचाने, लोक सेवक पर हमले, लोक सेवक के कार्य में बाधा, गैरकानूनी जमावड़ा, दुश्मनी फैलाने और राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप तथ्यहीन हैं।
उन्होंने कहा कि सामान्य आशय और आपराधिक साजिश जैसे प्रावधान भी जोड़े गए हैं, जो पूरी तरह अनुचित है।
सिंघवी ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और अदालत इस लोकतांत्रिक गतिविधि को समग्र रूप से देखेगी। इस मामले में आतंकवाद और राष्ट्रविरोध जैसे शब्दों का इस्तेमाल पूरी तरह गलत है।





