गढ़वा में अनोखा मामला: दूल्हा पसंद नहीं आया, शादी के बाद दहेज की वापसी के लिए बारातियों को बनाया बंधक

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गढ़वा। गढ़वा जिले के मेराल प्रखंड के हासनदाग गांव में शादी के क्रम में तीन से चार घंटे तक बैठे रहने के कारण दूल्हे का पैर शिथिल पड़ जाने और उठने में देरी होने पर दुल्हन पक्ष ने पलामू जिले के रामगढ़ प्रखंड के सरहुवा के दूल्हे को दिव्यांग बताकर शादी तोड़ दी। साथ ही लड़की को विदा करने से इनकार कर दिया गया। तिलक में दिए गए नगद और सामान वापस लेने के लिए बारातियों को 12 घंटे तक बंधक बनाए रखा। सारा सामान मिलने के बाद बारातियों को छोड़ा गया। बाराती बुधवार देर शाम घर पहुंचे थे।

इस संबंध में गुरुवार को लड़के के पिता दिनेश चौधरी ने आपबीती सुनाई। दिनेश चौधरी के बड़े पुत्र धनंजय चौधरी की शादी हासनदाग गांव में राजेंद्र चौधरी की लड़की के साथ तय हुई थी। 20 फरवरी को तिलक चढ़ा था और 24 फरवरी को बारात गई थी। बारात जाने के बाद द्वार पूजा, शादी तक सबकुछ ठीक ठाक था। अचानक विदाई के वक्त दूल्हे को नापसंद कर दिया गया।

कमी पूछने पर दूल्हे को दिव्यांग बताया गया और लडकी पक्ष ने बारातियों को बंधक बना लिया। बाराती बुधवार सुबह 05 बजे से लेकर शाम के 05 तक बंधक बने रहे। मामले को सुलझाने के लिए पंचायत बुलाई गई। पंचायत में कई जनप्रतिनिधि पहुंचे। वहीं दूल्हे के पिता का आरोप है कि किसी ने उनकी बात नहीं सुनी और लड़की पक्ष को ही सपोर्ट किया। अंततः दोनों तरफ के खर्चे को छोड़कर लेनदेन का सामान वापस करने का निर्णय लिया गया। सब कुछ क्लियर होने के बाद बारातियों को छोड़ा गया।

दूल्हे के पिता ने बताया कि शादी अक्टूबर 2025 में लगी थी। शादी लगने के बाद और विवाह के पहले तक लड़का 6 से 7 बार ससुराल चला गया था। बावजूद लड़के में कोई कमी नहीं निकाली गई। शादी में उन्होंने साढ़े 5 से 6 लख रुपए खर्च किया था।

इधर, बारात गए ग्रामीणों ने भी कहा कि धनंजय दिव्यांग नहीं है। शादी के समय तीन-चार घंटे तक बैठने के कारण उसका पैर शिथिल पड़ गया था। उठने में थोड़ी परेशानी हुई। इसी को मुद्दा बनाकर शादी से इनकार किया गया। उनकी प्रतिष्ठा तार तार हो गई है।

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