—गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल मॉनिटरिंग और मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण पर दिया जोर
रांची, 02 जून। झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren ने सोमवार को झारखंड मंत्रालय में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने राज्य के सरकारी अस्पतालों की आधारभूत संरचना, दवाओं की उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं की डिजिटल निगरानी और विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की।
गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवा सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राज्य के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण, सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को आम जनता से सीधे जुड़ा हुआ विभाग बताते हुए कहा कि स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक और बेहतर गुणवत्ता के साथ जोड़कर अधिक प्रभावी बनाने का निर्देश दिया।
सभी नागरिकों का हेल्थ प्रोफाइल तैयार करने का निर्देश
मुख्यमंत्री ने राज्य में बच्चों सहित सभी नागरिकों का डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणाली को मजबूत बनाने और तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।
बैठक में स्वास्थ्य मंत्री Irfan Ansari भी उपस्थित थे।
एम्बुलेंस सेवा पर नाराजगी, एआई कंट्रोल रूम बनेगा
राज्य में एम्बुलेंस सेवाओं के संचालन को लेकर मुख्यमंत्री ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दुर्घटना या आपात स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है, इसलिए एम्बुलेंस सेवा को तेज, प्रभावी और जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने एम्बुलेंस सेवाओं की निगरानी के लिए एआई आधारित कंट्रोल रूम स्थापित करने का निर्देश दिया। साथ ही स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़े सभी एम्बुलेंसों को पूरी तरह क्रियाशील रखने और लापरवाही करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने को कहा।
उबर मॉडल जैसी व्यवस्था पर अध्ययन का निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आपातकालीन स्थिति में मरीजों को शीघ्र अस्पताल पहुंचाने के लिए “उबर कॉन्सेप्ट” जैसी तकनीकी व्यवस्था का अध्ययन करने और भविष्य में उसे लागू करने की संभावनाएं तलाशने का निर्देश दिया।
अस्पतालों में दवाएं, प्रसव सुविधा और स्वच्छता पर फोकस
मुख्यमंत्री ने अस्पतालों में उच्च गुणवत्ता वाली दवाओं की उपलब्धता, सुरक्षित प्रसव व्यवस्था और गरीब मरीजों के उपचार को प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों के प्रति किसी भी प्रकार की संवेदनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अस्पतालों में साफ-सफाई की व्यवस्था को आवश्यकता अनुसार पीपीपी मॉडल पर संचालित करने के भी निर्देश दिए गए।
एएनएम और जीएनएम नियुक्तियों में तेजी लाने के निर्देश
मानव संसाधन की कमी को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने एएनएम और जीएनएम की नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के कारण मरीजों का इलाज प्रभावित नहीं होना चाहिए।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग स्वास्थ्य रणनीति
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की स्वास्थ्य चुनौतियां अलग-अलग हैं। इसे ध्यान में रखते हुए दोनों क्षेत्रों के लिए अलग कार्ययोजना तैयार की जाए।
उन्होंने कैंसर, हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों के लिए विशेष आपातकालीन सेवाएं विकसित करने पर भी जोर दिया।
मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाने का निर्देश
राज्य के मेडिकल कॉलेजों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) सीटों में वृद्धि के निर्देश दिए। साथ ही पैरालिसिस अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों के लिए विशेष चिकित्सा सुविधाएं विकसित करने को कहा।
उन्होंने कोडरमा, बोकारो, चाईबासा, दुमका, जमशेदपुर और हजारीबाग में निर्माणाधीन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों के कार्यों में तेजी लाकर उन्हें जल्द पूरा करने का निर्देश दिया।
अंगदान और ब्लड बैंक व्यवस्था मजबूत करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने किडनी, लीवर और कॉर्निया अंगदान के प्रति लोगों को जागरूक करने तथा अस्पतालों में इसके लिए आवश्यक व्यवस्था विकसित करने का निर्देश दिया।
इसके अलावा उन्होंने ब्लड बैंकों की व्यवस्था को मजबूत करने, रक्तदान शिविर आयोजित करने और सभी हेल्पलाइन एवं टोल-फ्री नंबरों को एआई आधारित प्रणाली से जोड़ने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने प्रत्येक जिले के उपायुक्तों को स्वास्थ्य शिविर और रक्तदान शिविर आयोजित कर स्वास्थ्य सेवाओं को और सशक्त बनाने के लिए पत्र जारी करने का निर्देश दिया।






