उम्र, लंबी न्यायिक हिरासत और ट्रायल की धीमी प्रगति को आधार बनाकर मिली जमानत
नई दिल्ली/रांची: झारखंड के पूर्व मंत्री Alamgir Alam को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। अदालत ने उनकी बढ़ती उम्र, लंबे समय से जेल में रहने और ट्रायल की प्रगति को आधार बनाते हुए यह फैसला सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट में SLP (Criminal) No. 11618/2025 और SLP (Criminal) No. 15905/2025 पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आलमगीर आलम के खिलाफ ECIR Case No. 2/2023 दर्ज है, जो ECIR/RNSZO/16/2020 से संबंधित है। मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है।
दो साल से जेल में बंद, उम्र का मिला लाभ
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि ट्रायल कोर्ट में चार प्रमुख गवाहों की गवाही पूरी हो चुकी है। साथ ही अदालत ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि 75 वर्षीय Alamgir Alam पिछले करीब दो वर्षों से जेल में बंद हैं। कोर्ट ने कहा कि मामले की परिस्थितियों और पूर्व में पारित आदेश को देखते हुए आरोपी को जमानत दी जाना उचित है। अदालत ने निचली अदालत के आदेश को निरस्त करते हुए आलमगीर आलम को बेल देने का निर्देश दिया।
ट्रायल कोर्ट तय करेगी जमानत की शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि Alamgir Alam को ट्रायल कोर्ट द्वारा तय की जाने वाली शर्तों के अधीन जमानत दी जाएगी। इसके साथ ही अदालत ने दोनों अपीलों को स्वीकार करते हुए लंबित आवेदनों का भी निस्तारण कर दिया।





