बिहार के 11 विश्वविद्यालयों पर 604 करोड़ यूसी लंबित, राज्यपाल सख्त; कुलपतियों से जवाब तलब, वित्तीय अनियमितता की आशंका

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पटना: बिहार के उच्च शिक्षा तंत्र में एक बड़ा वित्तीय मामला सामने आया है, जहां राज्य के 11 विश्वविद्यालयों ने सरकार को 604 करोड़ 20 लाख रुपये का उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूसी) अब तक नहीं सौंपा है। यह मामला वित्तीय वर्ष 2019-20 से लेकर 2024-25 तक का बताया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर गंभीर चिंता उत्पन्न हो गई है।

जानकारी के अनुसार, उपयोगिता प्रमाणपत्र वह दस्तावेज होता है, जिसके माध्यम से यह स्पष्ट किया जाता है कि सरकार द्वारा आवंटित राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुसार किया गया है या नहीं। ऐसे में इतने बड़े स्तर पर यूसी लंबित रहना वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।

इस मामले में महालेखाकार (AG) कार्यालय ने भी सख्त रुख अपनाया है और इसे गंभीर अनियमितता के रूप में देखा जा रहा है। उच्च शिक्षा विभाग ने पूरे प्रकरण से बिहार लोक भवन सचिवालय को अवगत करा दिया है, जिसके बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है।

राज्यपाल ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और कुलसचिवों से जवाब तलब किया है। साथ ही लंबित यूसी को जल्द से जल्द जमा करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर उपयोगिता प्रमाणपत्र नहीं दिया जाता है, तो इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और फंड के उपयोग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल इस मामले से शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और आगे सख्त कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

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