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बिहार में बड़ा यू-टर्न: सरकारी कर्मचारियों को परीक्षा पर लगी पाबंदी खत्म, अब फिर मिलेंगे करियर के पूरे मौके

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पटना : बिहार सरकार ने एक अहम फैसले में बड़ा बदलाव करते हुए सरकारी कर्मचारियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने को लेकर जारी विवादित आदेश वापस ले लिया है। यह निर्णय 6 अप्रैल को जारी उस निर्देश को रद्द करता है, जिसमें कर्मचारियों को सिर्फ एक बार परीक्षा देने की अनुमति दी गई थी। इस फैसले के वापस होने से राज्य के हजारों कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है।

पहले जारी आदेश में कहा गया था कि बार-बार प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने से सरकारी कामकाज प्रभावित होता है। इसी आधार पर कर्मचारियों के लिए एक सीमा तय कर दी गई थी। इतना ही नहीं, अगर कोई कर्मचारी दूसरी बार परीक्षा देना चाहता था, तो उसे अपनी नौकरी से इस्तीफा देना अनिवार्य था। इस शर्त ने कर्मचारियों के बीच असंतोष पैदा कर दिया था और इसे करियर के अवसरों को सीमित करने वाला कदम माना गया।

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इस विवाद के बाद सरकार ने मामले पर पुनर्विचार किया और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आदेश को पूरी तरह वापस लेने का फैसला किया। अब कर्मचारी पहले की तरह बिना किसी बाध्यता के विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा ले सकेंगे। इससे उनके करियर के विकल्प खुले रहेंगे और वे अपनी योग्यता के अनुसार आगे बढ़ सकेंगे।

हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों को अपने कार्यों की जिम्मेदारी निभानी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि परीक्षा की तैयारी के कारण सरकारी काम प्रभावित न हो। यानी सरकार अब संतुलन की नीति पर काम कर रही है, जहां कर्मचारियों को अवसर भी मिलेगा और प्रशासनिक व्यवस्था भी सुचारु बनी रहेगी।

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इस फैसले को व्यावहारिक और कर्मचारी हित में उठाया गया कदम माना जा रहा है। इससे न केवल कर्मचारियों में संतोष का माहौल बना है, बल्कि यह संकेत भी गया है कि सरकार समय-समय पर अपने फैसलों की समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर बदलाव करने के लिए तैयार है।

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