14 अप्रैल को इस्तीफे की चर्चा तेज, NDA में नए मुख्यमंत्री के नाम पर मंथन; जेडीयू और बीजेपी की बैठकों पर टिकी सबकी नजर
पटना। बिहार की राजनीति इस समय बेहद अहम दौर से गुजर रही है। सत्ता के गलियारों में जारी हलचल के बीच शनिवार को डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी अचानक मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। उनके साथ डिप्टी सीएम विजय सिन्हा और मंत्री लखेंद्र पासवान भी मौजूद थे। सीएम हाउस में हुई इस अहम बैठक ने राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को और तेज कर दिया है।
नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार में सत्ता परिवर्तन की पटकथा लिखी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, 14 अप्रैल को उनके इस्तीफे की संभावना जताई जा रही है, जिसके बाद अगले ही दिन नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो सकता है। इस बीच, मुख्यमंत्री आवास से सामान 7, सर्कुलर रोड स्थित आवास पर शिफ्ट किए जाने की खबरों ने सियासी सरगर्मियों को और बढ़ा दिया है।
जेडीयू नेताओं की दो घंटे चली बैठक
शनिवार को पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास पर जेडीयू नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक भी हुई। इसमें पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। करीब दो घंटे तक चली इस बैठक में नए मंत्रिमंडल के स्वरूप, संगठनात्मक रणनीति और युवा चेहरों को अवसर देने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
बीजेपी की बैठक पर भी सबकी नजर
उधर, भारतीय जनता पार्टी की भी पटना में अहम बैठक प्रस्तावित है। इसमें बिहार बीजेपी के प्रभारी विनोद तावड़े शामिल होंगे। बैठक में संभावित मुख्यमंत्री के चेहरे और सरकार गठन की रूपरेखा पर चर्चा होने की संभावना है। माना जा रहा है कि अंतिम फैसला एनडीए और केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर लिया जाएगा।
चिराग पासवान ने खुद को रेस से किया अलग
इस बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री पद की दौड़ से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे इस रेस में शामिल नहीं हैं। हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि सरकार का चेहरा बदल सकता है, लेकिन एनडीए का गठबंधन और फॉर्मूला यथावत रहेगा। वहीं भाजपा नेता दिलीप जायसवाल ने भी कहा कि बिहार के अगले मुख्यमंत्री का निर्णय एनडीए और केंद्रीय नेतृत्व द्वारा ही लिया जाएगा।
NDA में मंथन, सबकी निगाहें फैसले पर
लगातार हो रही बैठकों और नेताओं की सक्रियता से साफ है कि बिहार में जल्द ही बड़ा राजनीतिक फैसला हो सकता है। अब राज्य की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें एनडीए के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं, जो बिहार की सियासत की दिशा तय करेगा।





