नई दिल्ली, 09 अप्रैल। नरेन्द्र मोदी ने महिला आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुए सभी राजनीतिक दलों से इसके समर्थन की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह कदम भारत के लोकतंत्र को अधिक समावेशी और प्रतिनिधिक बनाने की दिशा में अहम साबित होगा।
लोकतंत्र को मिलेगा नया आयाम
प्रधानमंत्री ने अपने लेख में कहा कि संसद का विशेष सत्र केवल विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। इससे लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी को नई दिशा मिलेगी।
त्योहारों के जरिए एकता का संदेश
पीएम ने देश के विभिन्न हिस्सों में मनाए जाने वाले रोंगाली बिहू, महा बिशुबा पणा संक्रांति, पोइला बैशाख, विषु, पुथांडु और बैसाखी जैसे पर्वों की शुभकामनाएं देते हुए देश में सकारात्मकता और एकता का संदेश दिया।
महान हस्तियों को किया नमन
उन्होंने ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती और भीमराव अंबेडकर की जयंती का उल्लेख करते हुए सामाजिक न्याय और समानता के मूल्यों को याद किया।
हर क्षेत्र में बढ़ रही महिलाओं की भागीदारी
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाएं विज्ञान, तकनीक, खेल, उद्यमिता और सशस्त्र बलों समेत हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं, लेकिन राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी कम है।
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का जिक्र
उन्होंने सितंबर 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि इसे पूरी तरह लागू किया जाए।
2029 चुनाव से लागू करने की बात
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव और भविष्य के विधानसभा चुनावों में महिला आरक्षण लागू किया जाना चाहिए, जिससे शासन अधिक संवेदनशील और संतुलित बन सके।
सामूहिक संकल्प का समय
उन्होंने सभी सांसदों से अपील की कि वे इस ऐतिहासिक अवसर को समझें और महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन में आगे आएं। पीएम ने इसे पूरे राष्ट्र से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि यह आने वाली पीढ़ियों की दिशा तय करेगा।






