–परिसीमन का विरोध कर SC-ST सीट बढ़ोतरी रोकना चाहता विपक्ष
नई दिल्ली। अमित शाह ने महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर लोकसभा में हुई चर्चा के दौरान विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन के घटक दल ‘अगर-मगर’ और ‘किंतु-परंतु’ के जरिए महिला आरक्षण का विरोध कर रहे हैं।
‘खुलकर विरोध नहीं, पर कमजोर करने की कोशिश’
अमित शाह ने कहा कि चर्चा में 130 सदस्यों को बोलने का अवसर दिया गया, जिनमें 56 महिलाएं शामिल थीं। किसी ने भी खुलकर संवैधानिक संशोधन का विरोध नहीं किया, लेकिन अधिकांश विपक्षी दलों ने अप्रत्यक्ष रूप से इसे कमजोर करने का प्रयास किया।
परिसीमन पर विपक्ष को घेरा
गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि जो दल परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वे वास्तव में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए सीटों में बढ़ोतरी का भी विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संविधान में परिसीमन का प्रावधान जनसंख्या के आधार पर संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।
2029 चुनाव में महिला आरक्षण लागू करने का लक्ष्य
शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य महिला सशक्तीकरण को समयबद्ध तरीके से लागू करना है, ताकि 2029 का लोकसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ कराया जा सके। उन्होंने ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत को संविधान की मूल भावना बताया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में भारी असमानता है—कहीं 20 लाख से अधिक तो कहीं लगभग 6 लाख—जिससे वोट का मूल्य बराबर नहीं रह जाता।
जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होगा आरक्षण
गृह मंत्री ने बताया कि महिला आरक्षण का क्रियान्वयन 2026 के बाद होने वाली जनगणना और उसके आधार पर परिसीमन के बाद ही संभव है। यह प्रावधान पहले से ही कानून में मौजूद है।
विपक्ष पर ऐतिहासिक संदर्भ में भी आरोप
उन्होंने कहा कि 1970 के दशक में सीटों की संख्या बढ़ाने के बाद परिसीमन को फ्रीज कर दिया गया था, जिससे जनसंख्या वृद्धि के बावजूद प्रतिनिधित्व में बदलाव नहीं हो सका।
जनगणना में जातिगत आंकड़े भी होंगे शामिल
शाह ने कहा कि कोविड-19 के कारण जनगणना में देरी हुई, लेकिन अब इसे जल्द कराया जाएगा, जिसमें जातिगत आंकड़े भी शामिल होंगे। उन्होंने विपक्ष पर इस मुद्दे पर भ्रम फैलाने का आरोप भी लगाया।






