पटना: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर बिहार विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधायक राजू तिवारी ने प्रदर्शनकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आंदोलन में शामिल लोग छात्र नहीं बल्कि गुंडे थे, जिन्होंने नेताओं और पत्रकारों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा।
छात्रों पर लाठीचार्ज के मुद्दे पर सदन में हंगामा
बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान आरजेडी नेता आलोक कुमार मेहता ने छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और गोली चलने के मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में कई जगहों पर छात्रों के साथ पुलिस कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं।
इस पर एलजेपी (रामविलास) विधायक राजू तिवारी ने आपत्ति जताई और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
राजू तिवारी ने लगाए उपद्रवियों के आरोप
राजू तिवारी ने कहा कि प्रदर्शन के नाम पर जिस तरह पत्रकारों और नेताओं के साथ मारपीट की गई, वह छात्र आंदोलन नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने आंदोलन की आड़ में हिंसा और तोड़फोड़ की।
उन्होंने कहा, “जिस तरह परसों पत्रकारों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया है और नेताओं को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया है, ये छात्र आंदोलन नहीं था। ये गुंडे थे।”
राजू तिवारी ने सदन से ऐसे लोगों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि उपद्रवियों को विपक्षी विधायकों का समर्थन मिला और दावा किया कि उनके पास इसके सबूत भी हैं।
सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने
राजू तिवारी के बयान के बाद सदन में माहौल गरमा गया। जेडीयू विधायक मंजीत सिंह, बीजेपी विधायक संजीव चौरसिया समेत कई एनडीए विधायक अपनी सीटों से खड़े होकर नारेबाजी करने लगे।
वहीं विपक्षी सदस्य भी सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने सभी सदस्यों से शांत रहने और अपनी सीटों पर बैठने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा, लेकिन हंगामा जारी रहा।
बढ़ते विवाद के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
प्रदर्शन को लेकर जारी है राजनीतिक घमासान
नीट पेपर लीक और छात्रों पर कार्रवाई के मुद्दे को लेकर बिहार समेत देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। विपक्ष लगातार सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगा रहा है, जबकि एनडीए नेताओं का कहना है कि आंदोलन के नाम पर हिंसा और अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।






