नई दिल्ली/देहरादून: प्रधानमंत्री Narendra Modi मंगलवार को बहुप्रतीक्षित दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे का लोकार्पण करेंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत में विकास, कनेक्टिविटी और आर्थिक प्रगति को नई गति मिलने की उम्मीद है।
यह एक्सप्रेसवे ‘गति, शक्ति और प्रगति’ के नए आयाम स्थापित करेगा और देवभूमि उत्तराखंड के समग्र विकास में अहम भूमिका निभाएगा। परियोजना से दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा का समय घटकर महज ढाई घंटे रह जाएगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और निवेश को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
सहारनपुर में लोकार्पण, देहरादून में जनसभा
प्रधानमंत्री सुबह करीब साढ़े दस बजे उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के गणेशपुर पहुंचकर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami भी उपस्थित रहेंगे।
इसके बाद प्रधानमंत्री देहरादून पहुंचेंगे, जहां वे दोपहर 12 बजे मेजर जसवंत सिंह मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे।
स्टोरेज प्लांट का लोकार्पण स्थगित
प्रधानमंत्री को टिहरी में टीएचडीसी के 1,000 मेगावाट क्षमता वाले वेरिएबल स्पीड पंप स्टोरेज प्लांट का लोकार्पण भी करना था, लेकिन सोमवार देर शाम इस कार्यक्रम को फिलहाल स्थगित कर दिया गया।
उत्तर भारत की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के औद्योगिक, कृषि, पर्यटन और सेवा क्षेत्रों में नई ऊर्जा का संचार करेगा। यह परियोजना पारंपरिक पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को आधुनिक विकास मॉडल में बदलने में सहायक सिद्ध होगी। साथ ही रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
हरिद्वार और ऋषिकेश तक आसान पहुंच से चारधाम यात्रा सुगम होगी और यातायात जाम की समस्या में कमी आएगी, जिससे श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि की संभावना है।
एक नजर में दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे
परियोजना की मुख्य जानकारी:
- कुल लंबाई: लगभग 210–213 किलोमीटर
- यात्रा समय: 6 घंटे से घटकर लगभग 2.5 घंटे
- अधिकतम गति: 100 किमी/घंटा
- लागत: करीब 12,000–13,000 करोड़ रुपये
- लेन: 6 लेन (कुछ हिस्सों में 12 लेन)
प्रमुख रूट
- दिल्ली (अक्षरधाम) → बागपत → शामली → सहारनपुर → देहरादून
- यह एक्सप्रेसवे Delhi, Uttar Pradesh और Uttarakhand को सीधे जोड़ता है।
खास विशेषताएं
- एशिया का सबसे लंबा वन्यजीव एलिवेटेड कॉरिडोर (लगभग 12 किमी)
- राजाजी नेशनल पार्क क्षेत्र में इको-फ्रेंडली डिजाइन
- वन्यजीव अंडरपास और हरित अवसंरचना
- डाटकाली मंदिर क्षेत्र में सुरंग
- आधुनिक इंटरचेंज, सर्विस लेन और फ्लड-प्रूफ पिलर्स
यह एक्सप्रेसवे न केवल यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि उत्तर भारत में विकास, निवेश और पर्यटन के नए अवसर भी सृजित करेगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।






