कोलकाता/नई दिल्ली, 08 जून: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के साथ ही राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी है। सोमवार सुबह दिल्ली में उन्होंने अपने इस्तीफे की घोषणा की और पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए।
आरजी कर प्रकरण और भ्रष्टाचार बना मुख्य कारण
सुखेंदु शेखर राय ने कहा कि आरजी कर अस्पताल से जुड़े चर्चित मामले के बाद ही उन्होंने पार्टी छोड़ने का निर्णय ले लिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में बढ़ते भ्रष्टाचार तथा जनता के असंतोष ने पार्टी की स्थिति को कमजोर किया है।
पार्टी नेतृत्व पर लगाए गंभीर आरोप
पत्रकारों से बातचीत में राय ने कहा कि पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच चुका है और ईमानदार नेताओं को हाशिये पर धकेला जा रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तृणमूल के सभी नेता भ्रष्ट नहीं हैं।
संपत्ति की जांच की उठाई मांग
उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की आय और संपत्ति की जांच की मांग करते हुए कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है। आरजी कर मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आंतरिक जांच की मांग भी की थी।
सक्रिय राजनीति से संन्यास के संकेत
सुखेंदु शेखर राय ने संकेत दिया कि वह भविष्य में सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने पर भी विचार कर सकते हैं। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
‘इंडिया’ गठबंधन बैठक से पहले बढ़ी हलचल
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक के लिए दिल्ली पहुंचे हुए हैं। राय के इस्तीफे से पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
पहले से ही थे मुखर आलोचक
विधानसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद से ही सुखेंदु शेखर राय संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे थे। आरजी कर मामले के दौरान भी उन्होंने कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई थी।
अब उनके इस्तीफे को तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है।






