सुप्रीम कोर्ट का बुजुर्ग माता-पिता के हक में बड़ा फैसला, जरूरत पड़ने पर बच्चों और बहू को संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं; हाईकोर्ट का आदेश पलटा

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुजुर्ग माता-पिता के अधिकारों को लेकर बुधवार को अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर माता-पिता अपने बच्चों और बहू को संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं। अदालत ने कहा कि बुजुर्ग माता-पिता को अपने घर में सम्मान, सुरक्षा और गरिमा के साथ रहने का अधिकार है। यदि बेटे या बहू के घर में रहने से उनके भरण-पोषण या सुरक्षा में बाधा उत्पन्न हो रही है, तो उन्हें घर से बाहर करने का आदेश दिया जा सकता है।

बढ़ती उम्र अपमान के साथ जीने की मजबूरी नहीं

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि बढ़ती उम्र का अर्थ यह नहीं है कि बुजुर्गों को अपमान या असुरक्षा के साथ जीवन बिताना पड़े। कोर्ट ने टिप्पणी की कि सभ्य समाज वही है, जो अपने बुजुर्गों के साथ सम्मान और सुरक्षा का व्यवहार करे।

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला लखनऊ निवासी रवि कांत गुप्ता की याचिका पर सुनाया। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें बेटे और बहू को घर से बेदखल करने के एसडीएम और जिला मजिस्ट्रेट के आदेश रद्द कर दिए गए थे।

बुजुर्ग महिला को छोड़ना पड़ा था अपना घर

मामला लखनऊ के विकास नगर का है। यहां रवि कांत गुप्ता की 81 वर्षीय मां रहती थीं। आरोप था कि उनके पोते ने उन्हें अपने ही घर में रहने नहीं दिया। इसके बाद बुजुर्ग महिला को घर छोड़कर वृद्धाश्रम में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा।

मामला प्रशासन तक पहुंचने के बाद 15 नवंबर 2022 को एसडीएम ने बेटे को मकान से बाहर करने का आदेश दिया। प्रशासन ने माना कि बुजुर्ग महिला को अपने घर में रहने का अधिकार है।

जिला मजिस्ट्रेट ने भी बरकरार रखा था आदेश

एसडीएम के आदेश को बेटे ने चुनौती दी, लेकिन उसे राहत नहीं मिली। इसके बाद 9 अगस्त 2023 को जिला मजिस्ट्रेट ने एसडीएम के आदेश को बरकरार रखते हुए बेटे और बहू को मकान खाली करने का निर्देश दिया।

इसके बाद बेटे और बहू ने एसडीएम तथा जिला मजिस्ट्रेट के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने क्या कहा था?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत ट्रिब्यूनल को वरिष्ठ नागरिक की संपत्ति से उसके बच्चों को बेदखल करने का अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट ने एसडीएम और जिला मजिस्ट्रेट के दोनों आदेशों को रद्द कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने पलटा हाईकोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए जरूरत पड़ने पर ट्रिब्यूनल बेदखली का आदेश दे सकता है।

अदालत ने अपने फैसले में बुजुर्ग माता-पिता की गरिमा, सुरक्षा और शांतिपूर्ण जीवन के अधिकार को महत्वपूर्ण माना। इस फैसले से उन वरिष्ठ नागरिकों को कानूनी संरक्षण मजबूत हुआ है, जिन्हें अपने ही घर में बच्चों या अन्य परिजनों के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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