रांची: सुहागिन महिलाओं का आस्था और श्रद्धा का पर्व वट सावित्री आज पूरे श्रद्धा भाव के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र, परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना कर रही हैं। महिलाओं ने व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और बरगद के वृक्ष की परिक्रमा कर धागा बांधा।

इस पर्व का मुख्य आधार महाभारत में वर्णित सावित्री और सत्यवान की कथा मानी जाती है। मान्यता है कि सावित्री ने अपने तप, बुद्धि और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। बाद में इस कथा का उल्लेख स्कंद पुराण और पद्म पुराण में भी विस्तार से मिलता है।
इतिहासकारों के अनुसार, वट यानी बरगद वृक्ष की पूजा भारत में वैदिक काल से पहले की लोक परंपराओं का हिस्सा रही है। समय के साथ सावित्री-सत्यवान की कथा इस वृक्ष पूजा से जुड़ गई और यह पर्व विशेष रूप से उत्तर भारत, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में सदियों से मनाया जाता रहा है।
बरगद के वृक्ष को दीर्घायु, स्थिरता और जीवनचक्र का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे इस व्रत का केंद्र बनाया गया है। रांची सहित झारखंड के विभिन्न इलाकों में मंदिरों और बरगद के पेड़ों के आसपास सुबह से महिलाओं की भीड़ देखी गई।






