लातेहार के जंगल में सरकारी दवाइयां फेंकने के मामले पर बाबूलाल मरांडी का हमला, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल

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रांची। झारखंड के लातेहार जिले में जंगल में सरकारी दवाइयां फेंके जाने का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस घटना को स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता बताते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है।

सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर उठाए सवाल

बाबूलाल मरांडी ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर कथित घटना से जुड़ा वीडियो और तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि जंगल में सरकारी दवाइयों का फेंका जाना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि गरीब मरीजों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ है।

उन्होंने कहा कि ये दवाइयां गरीब मरीजों के इलाज के लिए थीं, जिन पर जनता के टैक्स का पैसा खर्च हुआ था। ऐसे में उनका इस तरह सड़क और जंगलों में फेंका जाना बेहद चिंताजनक है।

“गरीब मरीज दवा के लिए भटक रहे, दवाइयां सड़क पर पड़ी हैं”

मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में मरीज दवाओं, डॉक्टरों, बेड और जांच सुविधाओं के लिए परेशान हैं, जबकि दूसरी ओर लाखों रुपये की सरकारी दवाइयां फेंकी जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति इस घटना से उजागर हो गई है। सवाल यह है कि जब मरीज दवाओं के अभाव में परेशान थे, तब ये दवाइयां सड़क किनारे और जंगलों तक कैसे पहुंच गईं।

स्वास्थ्य मंत्री पर साधा निशाना

नेता प्रतिपक्ष ने स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जनता की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय वे सोशल मीडिया और बयानबाजी में अधिक व्यस्त दिखाई देते हैं।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “रील और कैमरों से अस्पताल नहीं चलते, डायलॉगबाजी से मरीजों का इलाज नहीं होता और धमकी देकर सच्चाई नहीं छिपाई जा सकती।”

जवाबदेही और कार्रवाई की मांग

मरांडी ने सरकार से पूछा कि इस मामले में अब तक कितने अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है और इस कथित लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं इस मामले को दबाने की कोशिश तो नहीं की जा रही।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता, पत्रकारों और विपक्ष को सवाल पूछने का अधिकार है। ऐसे सवालों का जवाब देने के बजाय यदि लोगों को डराने या चुप कराने की कोशिश की जाती है, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।

मुख्यमंत्री से भी पूछा सवाल

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि गरीबों की जिंदगी, जनता के टैक्स के पैसे और स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ इस तरह का व्यवहार कब तक जारी रहेगा।

उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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