नई दिल्ली, 10 जून: मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने का मामला अब राजनीतिक और कानूनी विवाद का विषय बन गया है। कांग्रेस ने इस फैसले को पूरी तरह अवैध बताते हुए चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
सिंघवी ने उठाए कानूनी सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधि विशेषज्ञ अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है, ऐसे में उनका नामांकन रद्द करने का कोई वैधानिक आधार नहीं बनता। उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर के निर्णय को कानून की गलत व्याख्या बताया।
‘नोटिस’ को नहीं माना जा सकता आपराधिक मामला
सिंघवी ने स्पष्ट किया कि किसी निजी शिकायत पर केवल नोटिस जारी होना आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता, जब तक अदालत उस पर संज्ञान न ले। उन्होंने कहा कि नटराजन के मामले में केवल नोटिस जारी हुआ था, जबकि न्यायालय ने अभी तक संज्ञान नहीं लिया है।
चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की अपील
उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की कि वह अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए इस फैसले की समीक्षा करे और इसे निरस्त करे। सिंघवी ने आरोप लगाया कि रिटर्निंग ऑफिसर ने स्वतंत्र और निष्पक्ष दृष्टिकोण नहीं अपनाया।
भाजपा की आपत्ति पर हुआ था नामांकन रद्द
गौरतलब है कि रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने भाजपा की ओर से दर्ज कराई गई आपत्ति को स्वीकार करते हुए मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया था। भाजपा का आरोप है कि नटराजन ने तेलंगाना में लंबित एक मामले की जानकारी नामांकन पत्र में नहीं दी।
कांग्रेस का पक्ष
कांग्रेस का कहना है कि संबंधित मामले में न तो एफआईआर दर्ज हुई थी और न ही अदालत ने संज्ञान लिया था। इसलिए उसका उल्लेख नामांकन पत्र में करना कानूनी रूप से आवश्यक नहीं था।
राजनीतिक विवाद गहराया
नामांकन रद्द होने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने भाजपा पर राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगाया। वहीं कांग्रेस सांसद विवेक तनखा ने भी इस फैसले को कानूनी रूप से कमजोर बताया।
चुनाव पर पड़ सकता है असर
इस फैसले का असर राज्यसभा चुनाव पर पड़ सकता है। यदि कांग्रेस को राहत नहीं मिलती है, तो राज्य की तीनों सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने की संभावना बढ़ जाएगी।
कांग्रेस ने शुरू की कानूनी तैयारी
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस मामले को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए कहा कि पार्टी इस फैसले को कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर चुनौती देगी।






