रांची। राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) और सीबीएसई परीक्षाओं में कथित पेपर लीक की घटनाओं के विरोध में मंगलवार को रांची महानगर युवा कांग्रेस के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने लोकभवन का घेराव किया। प्रदर्शन का नेतृत्व युवा कांग्रेस नेता गौरव सिंह ने किया।
निष्पक्ष जांच और एनटीए को भंग करने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने नीट-यूजी 2026 और सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं में पेपर लीक मामलों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने National Testing Agency (एनटीए) को भंग करने, केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे तथा परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार लागू करने की मांग उठाई।
छात्रों का भरोसा टूटा : युवा कांग्रेस
युवा कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रही परीक्षा अनियमितताओं ने लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों का भरोसा तोड़ दिया है। उनका कहना था कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से मेहनती और प्रतिभाशाली छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और प्रभावित परीक्षाओं को दोबारा आयोजित करने की मांग भी की।
“20 लाख छात्रों के सपनों को लगा झटका”
सभा को संबोधित करते हुए युवा कांग्रेस नेता गौरव सिंह ने कहा कि देशभर में 20 लाख से अधिक छात्र नीट परीक्षा में शामिल हुए थे। वर्षों की मेहनत और तैयारी के बाद परीक्षा देने वाले छात्रों को पेपर लीक की घटनाओं से बड़ा झटका लगा है।
उन्होंने कहा कि गरीब और मेहनती छात्रों की मेहनत को पेपर माफिया और व्यवस्था की खामियां बर्बाद कर रही हैं। गौरव सिंह ने कहा कि युवा कांग्रेस छात्रों के अधिकारों और उनके भविष्य की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी।
बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रहे मौजूद
प्रदर्शन में झारखंड प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष विक्की ठाकुर, शिल्पी वर्मा, प्रदेश महासचिव लक्ष्मीकांत, पूर्व महासचिव शादाब खान, प्रदेश सचिव आयुष अग्रवाल, रांची विधानसभा अध्यक्ष वसीम खान, हटिया अध्यक्ष आतिफ और कांके विधानसभा अध्यक्ष सैफुल्लाह खालिद समेत बड़ी संख्या में युवा कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग तेज
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की आवश्यकता है, ताकि छात्रों का विश्वास बहाल किया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।






