सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: खतरनाक आवारा कुत्तों को ‘दया मृत्यु’ की अनुमति, लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि

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–डॉग बाइट और रेबीज मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्यों को जारी किए 9 अहम निर्देश

नई दिल्ली। देश में बढ़ते डॉग बाइट और रेबीज के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और हर व्यक्ति को भयमुक्त वातावरण में जीने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि अत्यधिक आक्रामक, हिंसक या रेबीज जैसी गंभीर बीमारी से संक्रमित आवारा कुत्तों को कानून के दायरे में रहते हुए ‘यूथेनेशिया’ यानी दया मृत्यु दी जा सकती है।

“गरिमा के साथ जीने के अधिकार में सुरक्षित वातावरण भी शामिल”

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि संविधान ऐसे समाज की कल्पना नहीं करता जहां बच्चों और बुजुर्गों को अपनी सुरक्षा के लिए किस्मत के भरोसे रहना पड़े।

अदालत ने कहा कि “गरिमा के साथ जीने के अधिकार” में लोगों को आवारा कुत्तों के आतंक और खतरे से मुक्त वातावरण में रहने का अधिकार भी शामिल है।

अधिकारियों को चेतावनी, आदेश नहीं मानने पर अवमानना कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और स्थानीय निकायों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि आदेशों के पालन में लापरवाही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।

अदालत ने नवंबर 2025 में जारी अपने दिशा-निर्देशों को वापस लेने की मांग वाली याचिकाओं को भी खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के 9 बड़े निर्देश

1. पशु कल्याण नियमों का सख्त पालन

सभी राज्य सरकारें एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) के नियमों को सख्ती से लागू करें।

2. हर जिले में ABC सेंटर

देश के प्रत्येक जिले में कम से कम एक पूर्ण रूप से संचालित Animal Birth Control (ABC) सेंटर स्थापित किया जाए।

3. आबादी के अनुसार सेंटरों की संख्या बढ़े

अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त ABC सेंटर बनाए जाएं।

4. अदालत के आदेशों का शत-प्रतिशत पालन

सभी राज्यों और स्थानीय निकायों को अदालत के निर्देशों और पशु कल्याण नियमों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करना होगा।

5. सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था

स्कूल, अस्पताल, कोर्ट परिसर और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध कार्रवाई की जाए।

6. एंटी-रेबीज दवाओं का पर्याप्त स्टॉक

देशभर के स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-रेबीज वैक्सीन और दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

7. हाईवे से आवारा पशु हटाने का निर्देश

नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा पशुओं को हटाने और निगरानी तंत्र विकसित करने का निर्देश दिया गया।

8. खतरनाक कुत्तों के लिए यूथेनेशिया

रेबीज संक्रमित या अत्यधिक आक्रामक कुत्तों के मामलों में कानून के तहत दया मृत्यु जैसे कदम उठाने की अनुमति दी गई।

9. अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा

आदेश लागू करने वाले नगर निगम और सरकारी अधिकारियों को कानूनी संरक्षण दिया जाएगा। सामान्य परिस्थितियों में उनके खिलाफ FIR या दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के वकील ने दलील दी कि सभी कुत्ते आक्रामक नहीं होते। इस पर अदालत ने कहा, “कुत्तों को महान साबित करने की कोशिश न करें।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि आवारा कुत्तों से फैलने वाले संक्रमण और वायरस गंभीर चिंता का विषय हैं।

जुलाई 2025 से शुरू हुई थी सुनवाई

यह मामला जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने के बाद शुरू हुआ था। इसके बाद अदालत ने कई अंतरिम आदेश जारी किए और राज्यों को जवाबदेह ठहराया।

डॉग बाइट मामलों पर अदालत की चिंता

सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष कई राज्यों के चिंताजनक आंकड़े रखे गए।

  • तमिलनाडु में साल के शुरुआती चार महीनों में करीब दो लाख डॉग बाइट के मामले सामने आए।
  • श्रीगंगानगर में एक महीने के भीतर 1084 मामले दर्ज किए गए।

“मानव जीवन सर्वोपरि”

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि पशु अधिकार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन आम नागरिकों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा कि अब राज्यों और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे इन दिशा-निर्देशों को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करें।

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