पटना : बिहार सरकार ने शहीद सैनिकों के परिवारों के सम्मान और उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने घोषणा की है कि राज्य में शहीद सैनिकों के आश्रितों को बंदोबस्ती के तहत सरकारी जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। नई व्यवस्था के तहत पात्र परिवारों को आवास निर्माण के लिए 5 डिसमिल जमीन और खेती के लिए 1 एकड़ कृषि भूमि दी जाएगी। सरकार का मानना है कि यह फैसला शहीद परिवारों को आर्थिक, सामाजिक और मानसिक सहारा देने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
विभाग की ओर से सभी जिलों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जिला प्रशासन को कहा गया है कि शहीद सैनिकों के आश्रितों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर उन्हें योजना का लाभ दिया जाए। इसके साथ ही जमीन आवंटन की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया गया है ताकि लाभुक परिवारों को किसी प्रकार की प्रशासनिक परेशानी का सामना न करना पड़े। अधिकारियों को जमीन की उपलब्धता और बंदोबस्ती की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने स्पष्ट कहा है कि देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर जवानों का सम्मान सर्वोपरि है। राज्य सरकार का यह फैसला सिर्फ सहायता योजना नहीं, बल्कि शहीदों के बलिदान के प्रति सम्मान व्यक्त करने का प्रयास भी माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जिन परिवारों ने देश के लिए अपना बेटा, पति या पिता खोया है, उन्हें सम्मानजनक जीवन देना सरकार की जिम्मेदारी है।
इस फैसले के बाद राज्यभर में पूर्व सैनिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने सरकार की पहल का स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि जमीन मिलने से शहीद परिवारों को स्थायी सुरक्षा और आत्मनिर्भरता मिलेगी। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में खेती योग्य जमीन मिलने से परिवारों की आय का स्थायी स्रोत विकसित हो सकेगा। वहीं आवास के लिए जमीन मिलने से उन्हें अपना घर बनाने का अवसर भी मिलेगा।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अनुसार योजना को जल्द लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। प्रशासनिक स्तर पर जमीन चिन्हित करने का काम जारी है और आने वाले दिनों में आवेदन प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। सरकार को उम्मीद है कि यह पहल शहीद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम करेगी।






