पूर्वी सिंहभूम, 25 जुलाई । बोड़ाम थाना क्षेत्र स्थित डिमना लेक में दो युवा डॉक्टरों की डूबने से हुई मौत का मामला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार को मृतक डॉ. सक्षम सिंह और डॉ. समीर लाल के परिजनों ने घटना को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई और मामले की निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक जांच की मांग करते हुए बोड़ाम थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई।
परिजनों ने जताई हत्या की आशंका
डॉ. सक्षम सिंह के पिता एवं पलामू जिले के तरहसी निवासी सत्येंद्र कुमार सिंह ने पुलिस को दिए आवेदन में पूरे मामले की हर पहलू से जांच कराने की मांग की है। वहीं, डॉ. समीर लाल के पिता अजय लाल ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि दोनों युवकों की मौत की वास्तविक वजह सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है।
घटना की रात क्या हुआ?
सत्येंद्र कुमार सिंह के अनुसार, 24 जुलाई की सुबह उन्हें डॉ. सचिन का फोन आया, जिसमें बताया गया कि उनके पुत्र सक्षम सिंह और उसके मित्र डॉ. समीर लाल डिमना लेक में डूब गए हैं। सूचना मिलने पर परिवार तत्काल जमशेदपुर पहुंचा, जहां एमजीएम अस्पताल में सक्षम की मौत की पुष्टि हुई।
परिजनों को मिली जानकारी के अनुसार, घटना वाली रात करीब ढाई से तीन बजे के बीच सक्षम, समीर और उनके साथी डॉ. यश एमजीएम मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित हॉस्टल से समीर की कार से डिमना लेक गए थे। बताया गया कि रेडियल फाटक के पास गहरे पानी में पहले सक्षम का पैर फिसला और वह डूबने लगा। उसे बचाने के लिए समीर भी पानी में उतरा, लेकिन वह भी गहरे पानी में समा गया।
साथी डॉक्टर के बयान पर उठे सवाल
डॉ. यश के अनुसार, उसने दोनों को बचाने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद उसने वॉयस कमांड के जरिए अपने मोबाइल से डॉ. सचिन को फोन कर घटना की जानकारी दी और बाद में सुरक्षा गार्ड एवं पुलिस को सूचना दी।
हालांकि, मृतक के पिता ने इस घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि सक्षम पहले एक गंभीर सड़क दुर्घटना में घायल हो चुका था, जिसके कारण उसके एक हाथ की कार्यक्षमता पूरी तरह सामान्य नहीं थी। ऐसे में उसका गहरे पानी में उतरना स्वाभाविक प्रतीत नहीं होता। उन्होंने यह भी दावा किया कि डॉ. यश का सक्षम और समीर के साथ पहले भी कई बार विवाद हो चुका था तथा घटना वाली रात भी तीनों के बीच कहासुनी हुई थी।
वैज्ञानिक जांच की मांग
परिजनों ने पुलिस से मांग की है कि जांच केवल मौखिक बयानों तक सीमित न रखी जाए, बल्कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), मोबाइल लोकेशन, आपसी बातचीत, इलेक्ट्रॉनिक एवं भौतिक साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, विसरा जांच, एफएसएल रिपोर्ट तथा अन्य वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर की जाए।
तकनीकी साक्ष्यों के मिलान पर जोर
परिजनों ने यह भी मांग की है कि घटना के समय मौजूद सभी लोगों के बयान दर्ज कर उन्हें तकनीकी साक्ष्यों से मिलान किया जाए। यदि जांच में किसी व्यक्ति की लापरवाही या आपराधिक भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
न्याय पर भरोसा, सच्चाई सामने लाने की अपील
मृतकों के परिजनों ने कहा कि उन्हें झारखंड पुलिस और न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। उनकी केवल यही मांग है कि दोनों युवा डॉक्टरों की मौत की वास्तविक सच्चाई सामने आए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई की जाए।






