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झारखंड आंदोलन के शिल्पकार शिबू सोरेन को पद्मभूषण से आज नवाजा जाएगा, जानें-संघर्ष से शिखर तक का सफर

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रांची: झारखंड आंदोलन के प्रमुख शिल्पकार और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक नेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित किया जाएगा। 23 जून को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू यह सम्मान प्रदान करेंगी। उनकी ओर से उनकी पत्नी रूपी सोरेन यह सम्मान ग्रहण करेंगी।

संघर्ष से बनी पहचान

11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में जन्मे शिबू सोरेन का जीवन संघर्षों से भरा रहा। महज 13 वर्ष की उम्र में उनके पिता सोबरन सोरेन की हत्या हो गई, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी। इसके बाद उन्होंने महाजनों के खिलाफ आंदोलन छेड़ा और ग्रामीणों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया।

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‘दिशोम गुरु’ बनने की कहानी

संथाल परगना क्षेत्र में आदिवासियों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए उन्हें ‘दिशोम गुरु’ की उपाधि मिली। उन्होंने जल, जंगल और जमीन के मुद्दों को लेकर एक व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया और आदिवासी अस्मिता की आवाज को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया।

झारखंड आंदोलन के अग्रदूत

1970 के दशक में झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना कर उन्होंने अलग राज्य की मांग को संगठित स्वर दिया। साल 2000 में झारखंड राज्य के गठन के पीछे उनके आंदोलन और नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।

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लंबा राजनीतिक सफर

चार दशकों से अधिक लंबे राजनीतिक जीवन में शिबू सोरेन ने आंदोलनकारी, सांसद, केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री के रूप में काम किया। वे झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री रहे—2005, 2008 और 2009 में। इसके अलावा वे दुमका से आठ बार लोकसभा सांसद चुने गए और राज्यसभा के सदस्य भी रहे। केंद्र सरकार में उन्होंने तीन बार मंत्री पद की जिम्मेदारी निभाई।

आदिवासी अधिकारों के सशक्त स्वर

शिबू सोरेन को आदिवासी, गरीब, किसान और वंचित वर्गों की आवाज उठाने वाले नेता के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने ग्राम पंचायत से लेकर संसद तक इन वर्गों के अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष किया और कई बार राजनीतिक जोखिम भी उठाए।

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एक युग का अंत

81 वर्ष की आयु में 2025 में उनका निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही झारखंड की राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया, लेकिन उनके संघर्ष और विचार आज भी प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।

दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जीवन संघर्ष, नेतृत्व और जनसेवा का प्रतीक रहा है, जिसे पद्मभूषण सम्मान के माध्यम से देश ने सम्मानित किया है।

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