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किसानों के मुद्दे पर केंद्र का बंगाल सरकार पर निशाना, शिवराज बोले—घटिया राजनीति

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नई दिल्ली। लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पश्चिम बंगाल सरकार और विपक्ष पर आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने सस्ती और घटिया राजनीति के लिए गरीब किसानों को केंद्र की महत्वपूर्ण योजनाओं से वंचित कर “पाप” किया है।

उन्होंने कहा कि देशभर में रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन हो रहा है, लेकिन ममता बनर्जी सरकार ने केवल प्रधानमंत्री के नाम से आपत्ति के कारण योजनाएं लागू न कर किसानों के साथ खुला अन्याय किया है, जिसका जवाब पश्चिम बंगाल की जनता चुनाव में देगी।

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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि धन धान्य से जुड़ी महत्त्वपूर्ण योजना को पूरे देश के 100 में से 96 जिलों में लागू किया गया, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के चार जिलों– दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार, कालिम्पोंग, खड़गांव जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों को योजना से बाहर रखकर गरीब किसानों का नुकसान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि योजना का उद्देश्य इन जिलों में खेती की लागत घटाना, सिंचाई सुविधाएं बढ़ाना और ऋण की उपलब्धता सुधारना था, लेकिन ममता सरकार ने राजनीतिक द्वेष में किसानों तक यह लाभ पहुंचने नहीं दिया।

शिवराज सिंह चौहान ने इसे “शर्मनाक” बताते हुए कहा कि केवल इसलिए कि योजना के आगे प्रधानमंत्री का नाम जुड़ा है, टीएमसी सरकार इसे लागू नहीं कर रही, जबकि नुकसान सीधे खेतों में पसीना बहाने वाले किसानों को हो रहा है।

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केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और प्राकृतिक खेती मिशन जैसी कई केंद्रीय योजनाएं पश्चिम बंगाल में लागू न करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों ने क्या बिगाड़ा था, जो तृणमूल सरकार ने उन्हें सुरक्षा कवच से वंचित कर दिया। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर केंद्र सरकार रासायनिक खाद के अतिरिक्त उपयोग से मिट्टी और मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को देखते हुए प्राकृतिक खेती मिशन चला रही है, वहीं पश्चिम बंगाल सरकार इस मिशन को भी लागू नहीं कर रही, जिससे राज्य की जमीन और जनता के स्वास्थ्य की चिंता किए बिना केवल वोट बैंक साधने की राजनीति हो रही है।

कृषि मंत्री शिवराज ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन बढ़कर लगभग 357 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिससे भारत की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय दोनों मजबूत हुई हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने करीब 150 मिलियन टन से अधिक चावल उत्पादन के साथ चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है, जबकि गेहूं, सरसों, सोयाबीन, मूंगफली जैसी फसलों में भी रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज हुआ है।

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चौहान के अनुसार, पहले भारत को पीएल-480 के तहत आयातित गेहूं पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन आज हालात यह हैं कि देश के गोदाम गेहूं और चावल से भरे पड़े हैं और सरकार को चिंता इस बात की है कि “रखे कहां”, जबकि दुनिया भारत के किसानों और नीतियों की सराहना कर रही है। उन्होंने बताया कि दालों का उत्पादन लगभग 19 मिलियन टन से बढ़कर 25–26 मिलियन टन के आसपास पहुंच गया है और बागवानी उत्पादन भी 369 मिलियन टन से अधिक के स्तर पर पहुंच चुका है, जो किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बड़ा स्रोत बना है।

शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि टीएमसी सरकार की वजह से पश्चिम बंगाल के गरीब किसान केंद्र की कई महत्वपूर्ण योजनाओं से वंचित हैं, लेकिन जैसे ही राज्य में सरकार बदलेगी, भाजपा की सरकार सभी योजनाएं पूरी ताकत से लागू कर किसानों को उनका हक दिलाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का लक्ष्य भारत को दुनिया का “फूड बास्केट” बनाना और “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना के साथ वैश्विक खाद्य सुरक्षा में योगदान देना है, जबकि विपक्ष और तृणमूल केवल नारेबाजी और अवरोध की राजनीति कर रहे हैं, जिसे जनता लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं करेगी।

चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस चुनौती को समय रहते समझा और स्पष्ट संदेश दिया कि यह धरती केवल हमारी पीढ़ी के लिए नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित और उपजाऊ रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के जरिए सरकार मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ाने, भूमि को रसायनमुक्त बनाने और किसानों की लागत घटाकर उनकी आय बढ़ाने पर फोकस कर रही है। उन्होंने बताया कि गंगा जैसी नदियों के दोनों किनारों पर 5 किलोमीटर तक के क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए, बड़े पैमाने पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि पानी, जमीन और इंसान – तीनों का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि देशभर में 1 करोड़ से ज्यादा किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए संवेदनशील और प्रशिक्षित किया गया है और लाखों हेक्टेयर क्षेत्र में क्लस्टर बनाकर रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशक मुक्त खेती शुरू हो चुकी है।

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