JPSC परीक्षा रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक, सरकार से मांगा जवाब

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रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं, 12वीं और 13वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा तथा फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा को राज्य सरकार द्वारा रद्द किए जाने के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। गुरुवार को जस्टिस दीपक रोशन की बेंच ने इस मामले में सुनवाई करते हुए सरकार के परीक्षा रद्द करने के आदेश पर फिलहाल रोक लगाई और राज्य सरकार से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

हाईकोर्ट में सौरभ सिंह और सोनम कुमारी की ओर से सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले में तेजी लाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन का निर्देश भी दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

सरकार परीक्षा देने के बाद चयनित अभ्यर्थियों को सीधे नहीं हटा सकती: HC

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि JPSC परीक्षा देने के बाद चयनित हुए 70 प्रतिशत लोग भी गलत तरीके से आए हों, तब भी सरकार उन्हें सीधे सेवा से नहीं निकाल सकती। अदालत की इस टिप्पणी को परीक्षा रद्द किए जाने के बाद नियुक्त अधिकारियों के भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सोनम कुमारी ने सरकार के फैसले को दी चुनौती

11वीं से 13वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा रद्द होने के बाद सेवा से प्रभावित हुईं डिप्टी कलेक्टर सोनम कुमारी ने राज्य सरकार की अधिसूचना को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

सोनम कुमारी हजारीबाग जिले में डिप्टी कलेक्टर के पद पर कार्यरत थीं। याचिका में कहा गया है कि JPSC की विज्ञापन संख्या 01/2024 को राज्य सरकार ने मेमो नंबर 5404/18.8.2026 के माध्यम से रद्द कर दिया है।

याचिका के अनुसार, JPSC परीक्षा में चयन के बाद सोनम कुमारी ने बिहार के गया जिले में शिक्षक की नौकरी छोड़कर झारखंड में योगदान दिया था। उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला था और इसके बाद उन्होंने डिप्टी कलेक्टर के पद पर योगदान दिया।

उन्होंने हाईकोर्ट से राज्य सरकार की ओर से जारी परीक्षा रद्द करने वाली अधिसूचना को निरस्त करने की मांग की है।

करीब 200 उप समाहर्ताओं की ट्रेनिंग रुकी

JPSC की 11वीं, 12वीं और 13वीं सिविल सेवा परीक्षा रद्द किए जाने का असर इससे चयनित करीब 200 उप समाहर्ताओं पर भी पड़ा है। परीक्षा के आधार पर नियुक्त इन अधिकारियों की ट्रेनिंग बीच में ही रुक गई है।

इन अधिकारियों ने हाल ही में श्रीकृष्ण लोक प्रशासन प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद उन्हें जिलों में प्रशिक्षण और प्रोबेशन अवधि के लिए भेजा गया था। परीक्षा रद्द होने के बाद उनकी नियुक्ति की वैधता पर भी सवाल खड़ा हो गया है।

इस स्थिति के कारण कई प्रोबेशन उप समाहर्ता असमंजस में हैं और रांची पहुंचने लगे हैं।

बाबा धाम और बासुकीनाथ से भी हटाए गए प्रोबेशन अधिकारी

श्रावणी मेला के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 40 प्रोबेशन उप समाहर्ताओं को देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में प्रतिनियुक्त किया गया था। वहीं, दुमका जिले के बासुकीनाथ में 23 प्रोबेशन उप समाहर्ताओं को दंडाधिकारी की जिम्मेदारी दी गई थी।

परीक्षा रद्द होने के बाद इन अधिकारियों की सेवा स्थिति प्रभावित होने के कारण उन्हें इन जिम्मेदारियों से भी हटा दिया गया है।

15 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

झारखंड हाईकोर्ट ने फिलहाल सरकार के परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने मामले में फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठन का भी निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

JPSC परीक्षा रद्द होने के बाद करीब 200 नवनियुक्त उप समाहर्ताओं के भविष्य पर भी अदालत के अगले आदेश का इंतजार है।

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