एक्शन में हेमंत सरकार: संपत्ति का ब्योरा देने में 40% का उछाल, रिटायर कर्मचारियों को समय पर पेंशन की तैयारी

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रांची: झारखंड सरकार ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सेवा संबंधी प्रक्रियाओं की डिजिटल निगरानी तेज कर दी है। राज्य सरकार की ऑनलाइन मॉनिटरिंग व्यवस्था का असर अब आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, वार्षिक संपत्ति विवरण और गोपनीय रिपोर्ट समय पर जमा करने वाले अधिकारियों की संख्या में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धिदर्ज की गई है।

सरकार द्वारा लागू “कर्मचारी एसीआर, एपीआर, डीपीडी सबमिशन स्टेटस रिपोर्ट” के जरिए क्लास-वन और क्लास-टू अधिकारियों की वार्षिक संपत्ति घोषणा और गोपनीय रिपोर्ट की निगरानी की जा रही है। सख्त डिजिटल ट्रैकिंग के कारण अब अधिकारी निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने दस्तावेज जमा कर रहे हैं।

रिटायरमेंट से पहले पूरी होगी पेंशन प्रक्रिया

सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन और ग्रेच्युटी के लिए दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए सरकार ने “निकास कर्मचारी विवरण रिपोर्ट”प्रणाली लागू की है। इसके तहत अगले छह महीनों में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों का डेटा पहले ही सत्यापित कर लिया जाता है, जिससे रिटायरमेंट के दिन से ही पेंशन भुगतान की प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके।

विभागवार प्रगति

कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग

विभाग के अधीन अधिकारियों की ई-सेवा पुस्तिका से जुड़े 90 प्रतिशत से अधिक प्रपत्रों की प्रविष्टि पूरी कर ली गई है।

वित्त विभाग

92 प्रतिशत से अधिक आहरण-वितरण पदाधिकारियों (DDO) और स्थापना प्रभारियों का डेटा लाइव लिंक कर दिया गया है, जिससे वेतन भुगतान में तकनीकी बाधाओं की संभावना कम हुई है।

गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग

पुलिस और जेल प्रशासन जैसे बड़े विभाग में शुरुआती चुनौतियों के बावजूद डेटा लॉकिंग का कार्य 82 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग

प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के 88 प्रतिशत से अधिक शिक्षकों एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों का डेटा लॉक किया जा चुका है। शेष 12 प्रतिशत रिकॉर्ड सत्यापन के लिए लंबित हैं, जिन्हें जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया है।

स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं कल्याण विभाग

डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल कर्मियों के 95 प्रतिशत स्वीकृत पदों का लाइव मिलान कार्यरत कर्मचारियों से किया जा चुका है। इससे बिना स्वीकृत पदों पर वर्षों से जमे कर्मियों की पहचान और निगरानी आसान होगी।

ग्रामीण विकास एवं पथ निर्माण विभाग

प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत 78 प्रतिशत इंजीनियरों और अधिकारियों की सेवा पुस्तिकाओं को ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ दिया गया है। सरकार का दावा है कि इससे अवैध प्रतिनियुक्ति पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

पारदर्शी प्रशासन पर जोर

राज्य सरकार का मानना है कि डिजिटल मॉनिटरिंग और ऑनलाइन सत्यापन प्रणाली से न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि कर्मचारियों की सेवा संबंधी प्रक्रियाओं में भी तेजी आएगी। संपत्ति विवरण, सेवा पुस्तिका, पेंशन और पदस्थापन से जुड़े रिकॉर्ड के केंद्रीकृत डिजिटल प्रबंधन से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और जवाबदेही तय करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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