देहरादून, 19 मई। मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी का मंगलवार सुबह निधन हो गया। वह 92 वर्ष के थे। भाजपा के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री खंडूरी ने देहरादून स्थित मैक्स हॉस्पिटल में पूर्वाह्न करीब 11:15 बजे अंतिम सांस ली। उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्हें करीब 15 दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
राजनीतिक और सैन्य जीवन में बनाई अलग पहचान
मेजर जनरल खंडूरी भारतीय सेना में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद राजनीति में आए थे।
उन्होंने 1954 से 1990 तक भारतीय सेना की कोर ऑफ इंजीनियर्स में सेवा दी। सेना में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 1982 में उन्हें राष्ट्रपति द्वारा अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था।
सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए।
दो बार बने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री
खंडूरी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में दो कार्यकाल संभाले। वह अपनी साफ-सुथरी छवि, ईमानदार प्रशासन, सादगी और सुशासन के लिए जाने जाते थे।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री के रूप में भी कार्य किया।
इसके अलावा वे गढ़वाल क्षेत्र से कई बार लोकसभा सांसद भी चुने गए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जताया शोक
पुष्कर सिंह धामी ने मेजर जनरल खंडूड़ी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खंडूरी ने सैन्य जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में खंडूरी ने उत्तराखंड में विकास, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई।
“राष्ट्रीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति”
मुख्यमंत्री धामी ने अपने शोक संदेश में कहा कि मेजर जनरल खंडूरी का निधन केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी अपूरणीय क्षति है।
उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
परिवार में राजनीतिक विरासत
मेजर जनरल खंडूरी की पुत्री ऋतु खंडूड़ी भूषण वर्तमान में उत्तराखंड विधानसभा की अध्यक्ष हैं। वहीं उनके पुत्र मनीष खंडूरी भाजपा से जुड़े रहे हैं।






