रांची। झारखंड में फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश पाने का बड़ा खेल लगातार सामने आ रहा है। हाल के महीनों में पुलिस और जांच एजेंसियों ने कई जिलों में कार्रवाई कर ऐसे संगठित गिरोहों का पर्दाफाश किया है, जो पैसे लेकर नकली दस्तावेज तैयार कर रहे थे।
कई जिलों में फैला नेटवर्क
सूत्रों के अनुसार यह फर्जीवाड़ा रांची, पलामू, धनबाद, बोकारो और जामताड़ा समेत कई जिलों तक फैला हुआ है। जांच में सामने आया है कि एक फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के लिए 5 हजार से 50 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं, जबकि नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की डील भी हो रही है।
आरक्षण का गलत फायदा
जांच एजेंसियों के अनुसार सबसे अधिक मामले अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के फर्जी प्रमाण पत्रों से जुड़े हैं। आरक्षण का लाभ लेने के लिए बड़े पैमाने पर जालसाजी की जा रही है, जिससे योग्य उम्मीदवारों का हक प्रभावित हो रहा है।
सिस्टम पर उठे सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों से भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बार-बार खुलासों के बावजूद यह रैकेट सक्रिय है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था और जांच प्रणाली की कमजोरियां उजागर हो रही हैं।
सख्ती के दावे, जमीन पर चुनौतियां
हाल ही में कई जिलों के प्रशासन ने प्रमाण पत्र सत्यापन प्रक्रिया को सख्त करने की बात कही है। डिजिटल वेरिफिकेशन और आधार लिंकिंग जैसे उपायों पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन बिचौलियों का नेटवर्क अब भी सक्रिय है।
प्रमुख केस स्टडी
● 28 अप्रैल 2026 – धनबाद
धनबाद में ग्रामीण डाक सेवा भर्ती के दौरान आठ अभ्यर्थी फर्जी प्रमाण पत्र के साथ पकड़े गए। एक बिचौलिया भी गिरफ्तार किया गया।
● 30 अप्रैल 2026 – रांची
रांची के रिम्स में एमएचए की छात्रा का फर्जी दस्तावेज के आधार पर नामांकन रद्द किया गया।
● 2026 – धनबाद
फर्जी मैट्रिक सर्टिफिकेट के जरिए नौकरी पाने की कोशिश का मामला सामने आया। पुलिस ने एक दलाल को हिरासत में लिया और जांच जारी है।
● 15 मार्च 2026 – बोकारो
बोकारो में निवास प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। तीन लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई।
● 22 मार्च 2026 – जामताड़ा
जामताड़ा में साइबर ठगी गिरोह का फर्जी सर्टिफिकेट कनेक्शन सामने आया।
● 2 अप्रैल 2026 – हजारीबाग
हजारीबाग में शिक्षक बहाली में फर्जी प्रमाण पत्र का मामला सामने आया, जिसके बाद जांच कमेटी गठित की गई।
● 25 अप्रैल 2026 – पलामू
पलामू में आंगनबाड़ी चयन में फर्जी दस्तावेज का खुलासा हुआ, जिसके बाद जांच के आदेश दिए गए।
● 13 नवंबर 2025 – दुमका
दुमका के मेडिकल कॉलेज में फर्जी ST प्रमाण पत्र के आधार पर एडमिशन लेने वाली छात्रा का नामांकन रद्द किया गया।
● 19 फरवरी 2026 – अंतरराज्यीय रैकेट
महाराष्ट्र पुलिस ने 15,569 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले बड़े गिरोह का खुलासा किया, जिसमें झारखंड के लोगों की संलिप्तता सामने आई।
निष्कर्ष
फर्जी प्रमाण पत्रों का यह बढ़ता नेटवर्क न केवल प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि युवाओं के भविष्य और व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। सख्त निगरानी, तकनीकी सुधार और त्वरित कार्रवाई ही इस समस्या पर नियंत्रण का एकमात्र रास्ता नजर आता है।





