विश्व हास्य दिवस: हँसी की कमी से बढ़ रहा मानसिक तनाव – नागेश्वर दास

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पटना: विश्व हास्य दिवस के अवसर पर लाफिंग बुद्धा नागेश्वर दास ने समाज की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज का इंसान शिक्षित तो हो रहा है, लेकिन मानसिक रूप से कमजोर होता जा रहा है। डिग्रियों और सुविधाओं में बढ़ोतरी के बावजूद लोगों के जीवन से सुकून और हँसी धीरे-धीरे गायब होती जा रही है।

उन्होंने बताया कि पहले लोग सीमित संसाधनों में भी खुश रहते थे। छोटी-छोटी बातों को हँसकर टाल देते थे और रिश्तों में मतभेद होने के बावजूद मनभेद नहीं होते थे। परिवार और समाज में आपसी मेल-जोल और अपनापन बना रहता था, जिससे जीवन संतुलित और सुखद रहता था।

नागेश्वर दास ने चिंता जताई कि आज के दौर में लोग उच्च शिक्षा और बड़े पद तो हासिल कर रहे हैं, लेकिन बढ़ते तनाव और अकेलेपन के कारण अंदर से टूटते जा रहे हैं। आत्महत्या जैसी घटनाओं में बढ़ोतरी को उन्होंने समाज में बढ़ते मानसिक दबाव का संकेत बताया। उनका मानना है कि इसका एक बड़ा कारण लोगों के जीवन से हँसी का कम होना है।

उन्होंने यह भी कहा कि आज बच्चों का बचपन मोबाइल तक सीमित होता जा रहा है। पहले बच्चे खेल-कूद और परिवार के साथ हँसी-खुशी में बड़े होते थे, जबकि अब वे तनाव और अकेलेपन के माहौल में पल रहे हैं, जिससे उनके मानसिक विकास पर असर पड़ रहा है।

नागेश्वर दास के अनुसार, हँसी केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य की एक महत्वपूर्ण शक्ति है। खुलकर हँसने से व्यक्ति में सहनशीलता, धैर्य और सकारात्मक सोच विकसित होती है, जिससे वह जीवन की चुनौतियों का बेहतर सामना कर पाता है।

अंत में उन्होंने अपील की कि बच्चों को केवल सफल ही नहीं, बल्कि खुश और हँसमुख बनाना भी जरूरी है। उनका कहना था कि जिस घर और समाज में हँसी बनी रहती है, वहीं सुकून, अपनापन और मानवता भी जीवित रहती है।

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