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झारखंड में विकास पर ‘ग्रीन मुहर’: 155 प्रोजेक्ट्स को पर्यावरण मंजूरी, कई अब भी अटके

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रांची: Jharkhand में विकास और पर्यावरण संतुलन की चुनौती के बीच 155 बड़े प्रोजेक्ट्स को पर्यावरणीय स्वीकृति (EC) मिल चुकी है, जबकि कई परियोजनाएं अब भी सख्त नियमों के चलते लंबित हैं। राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) और केंद्र के आंकड़ों से यह तस्वीर सामने आई है।

किन प्रोजेक्ट्स को मिली हरी झंडी

राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर और खनन क्षेत्र को गति देने के लिए कई अहम परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है—

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  • हंसबारी स्टोन माइन (गिरिडीह) – पत्थर खनन के लिए स्वीकृति
  • नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (सरायकेला-खरसावां) – स्वास्थ्य क्षेत्र को बढ़ावा
  • मेसर्स लाल स्टील प्राइवेट लिमिटेड (गिरिडीह) – औद्योगिक विस्तार
  • धोरी CCL प्रोजेक्ट (बोकारो) – Coal India Limited की परियोजना को संशोधित मंजूरी
  • कुजाम बॉक्साइट माइंस (गुमला) – Hindalco Industries की लंबित परियोजना को हरी झंडी

अब भी ‘रेड जोन’ में कई प्रोजेक्ट्स

कुछ प्रमुख सेक्टर अब भी पर्यावरणीय नियमों में फंसे हुए हैं—

  • बालू घाट – 389 में से केवल ~21 ही पूरी मंजूरी के साथ चालू
  • सेरांगदाग बॉक्साइट प्रोजेक्ट (हिंडाल्को) – अतिरिक्त तकनीकी जानकारी के कारण लंबित
  • पश्चिमी सिंहभूम की लौह अयस्क खदानें – हाथी कॉरिडोर और वन क्षेत्र के कारण रोक

बड़ी चुनौतियां

  • Supreme Court of India का सख्त रुख: बिना अनुमति शुरू परियोजनाओं को अब बाद में मंजूरी मिलना मुश्किल
  • Comptroller and Auditor General of India की रिपोर्ट: लघु खनिज प्रबंधन में अनियमितताओं से प्रक्रिया कड़ी
  • डिजिटल निगरानी: Parivesh 2.0 Portal के जरिए हर प्रोजेक्ट की लाइव ट्रैकिंग

फैक्ट फाइल

  • 155 प्रोजेक्ट्स को पर्यावरण मंजूरी (खनन, सौर ऊर्जा, अस्पताल आदि)
  • 85 प्रोजेक्ट्स अभी प्रक्रियाधीन या अस्वीकृत
  • फोकस: पारदर्शिता, जवाबदेही और पर्यावरण संरक्षण

झारखंड में अब “पहले मंजूरी, फिर काम” का सख्त मॉडल लागू होता दिख रहा है। इससे एक ओर विकास परियोजनाओं को वैधानिक मजबूती मिल रही है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करने वालों के लिए रास्ता कठिन होता जा रहा है। कुल मिलाकर, राज्य में विकास की रफ्तार जारी है, लेकिन अब यह पर्यावरणीय संतुलन की कसौटी पर परखी जा रही है।

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