काठमांडू: नेपाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद बालेन्द्र शाह ने सख्त कदम उठाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार करवा दिया है। इस कार्रवाई से देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
सुबह 5 बजे हुई गिरफ्तारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने शनिवार सुबह करीब 5 बजे भक्तपुर के गुंडू स्थित ओली के आवास से उन्हें हिरासत में लिया। वहीं, पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को सूर्यविनायक स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया गया।
काठमांडू घाटी पुलिस के प्रवक्ता ओम अधिकारी ने बताया कि गृह मंत्रालय की औपचारिक शिकायत और वारंट के बाद यह कार्रवाई की गई है। अब कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई होगी।
जांच आयोग की रिपोर्ट बनी आधार
यह कार्रवाई गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता वाले जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर की गई है। रिपोर्ट में ओली और लेखक को सितंबर 2025 में हुए ‘जेन-जी आंदोलन’ को बलपूर्वक दबाने का दोषी ठहराया गया है।
नई सरकार ने सत्ता में आते ही इस रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करने का फैसला किया, जिसके तुरंत बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू हो गई।
क्या था ‘Gen Z’ आंदोलन?
नेपाल में सितंबर 2025 में युवाओं का गुस्सा उस वक्त फूट पड़ा था, जब तत्कालीन सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर देशव्यापी बैन लगा दिया था। इसके साथ ही बढ़ती बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सामाजिक असमानता को लेकर भी युवाओं में नाराजगी थी।
इस आंदोलन के दौरान हिंसा में 77 लोगों की मौत हुई थी और बड़े पैमाने पर संपत्ति का नुकसान हुआ था।
युवाओं के समर्थन से सत्ता में आए बालेन शाह
मार्च 2026 में समय से पहले हुए चुनाव में बालेन्द्र शाह की पार्टी ने भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडे के साथ जीत दर्ज की। बड़ी संख्या में युवा वोटर्स के समर्थन ने उन्हें सत्ता तक पहुंचाया।
सख्त संदेश
सरकार के इस कदम को पुराने मामलों में जवाबदेही तय करने और कानून का राज स्थापित करने की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है। हालांकि, विपक्ष इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित भी बता सकता है।





