हर्ष फायरिंग केस में बीजेपी विधायक राजू सिंह को 4 साल की सजा, विधायकी पर संकट

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नई दिल्ली/पटना: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज से बीजेपी विधायक राजू सिंह को गैर इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के मामले में दोषी ठहराते हुए चार साल की सजा सुनाई है। यह मामला 31 दिसंबर 2018 की रात नए साल के जश्न के दौरान हुई हर्ष फायरिंग से जुड़ा है, जिसमें गोली लगने से आर्किटेक्ट अर्चना गुप्ता की मौत हो गई थी।

क्या था मामला?

31 दिसंबर 2018 को नए साल के जश्न के दौरान कथित तौर पर की गई हर्ष फायरिंग में निकली गोली अर्चना गुप्ता को लग गई थी। गंभीर रूप से घायल अर्चना की इलाज के दौरान 3 जनवरी 2019 को मौत हो गई थी। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने गैर इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था।

पत्नी समेत तीन आरोपी बरी

अदालत ने राजू सिंह को दोषी ठहराते हुए चार साल की सजा सुनाई। वहीं, इस मामले में उनकी पत्नी रेणु सिंह तथा अन्य दो आरोपी राणा सिंह और रामेंद्र सिंह को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।

कौन हैं राजू सिंह?

राजू सिंह ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 2005 में लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) से की थी। बाद में वे विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) में शामिल हुए और 2020 में विधायक बने। वर्ष 2022 में उन्होंने बीजेपी का दामन थामा और बाद में बिहार सरकार में मंत्री भी रहे। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार के रूप में साहेबगंज सीट से जीत दर्ज की थी।

क्या जाएगी विधायकी?

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के अनुसार, यदि किसी सांसद या विधायक को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता अयोग्य घोषित की जा सकती है। चार साल की सजा के बाद राजू सिंह की विधानसभा सदस्यता पर संकट गहरा गया है। हालांकि, अंतिम स्थिति अदालत के आदेश, अपील और विधानसभा सचिवालय की कानूनी प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।

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