रांची, 18 जुलाई। एशिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित फुटबॉल टूर्नामेंट 135वें डूरंड कप-2026 की तीनों ट्रॉफियां शनिवार को रांची पहुंचीं। दीपाटोली मिलिट्री स्टेशन स्थित केरकेट्टा ऑडिटोरियम में आयोजित ट्रॉफी शोकेस समारोह के साथ राजधानी में डूरंड कप का औपचारिक आगाज हुआ।
समारोह में पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य मंत्री सुदिव्य कुमार मुख्य अतिथि तथा आईबीजी-23 के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) मेजर जनरल सज्जन सिंह मान सम्मानित अतिथि के रूप में शामिल हुए।
तीनों ट्रॉफियों का हुआ भव्य प्रदर्शन
कार्यक्रम में डूरंड कप, प्रेसिडेंट्स कप और शिमला ट्रॉफी का भव्य प्रदर्शन किया गया। सेना के अधिकारियों, खेल विभाग के प्रतिनिधियों, फुटबॉल खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों और मीडिया प्रतिनिधियों ने ट्रॉफियों का स्वागत किया। इस दौरान डूरंड कप के गौरवशाली इतिहास और भारतीय फुटबॉल में उसके योगदान पर भी प्रकाश डाला गया।
झारखंड के लिए गर्व का विषय : सुदिव्य कुमार
मुख्य अतिथि सुदिव्य कुमार ने कहा कि झारखंड लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की सफल मेजबानी कर रहा है। डूरंड कप जैसे ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का रांची में आयोजन राज्य के लिए गर्व की बात है।
उन्होंने कहा कि इस प्रतियोगिता से राज्य में फुटबॉल संस्कृति को नई ऊर्जा मिलेगी और युवा खिलाड़ियों को देश के शीर्ष फुटबॉलरों से सीखने और प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा।
खेल अधोसंरचना को मजबूत करने पर जोर
सुदिव्य कुमार ने कहा कि राज्य सरकार खेलों के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। खिलाड़ियों को बेहतर खेल अधोसंरचना, आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि डूरंड कप का आयोजन झारखंड को देश के खेल मानचित्र पर और मजबूत पहचान दिलाएगा।
भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक
मेजर जनरल सज्जन सिंह मान ने कहा कि डूरंड कप केवल एक फुटबॉल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा, अनुशासन और खेल भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह टूर्नामेंट देशभर के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी क्षमता दिखाने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।
उन्होंने रांचीवासियों से बड़ी संख्या में स्टेडियम पहुंचकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने की अपील भी की।
26 जुलाई से रांची में होंगे मुकाबले
इस वर्ष डूरंड कप का 135वां संस्करण देश के छह शहरों में आयोजित किया जा रहा है। रांची में प्रतियोगिता के मुकाबले 26 जुलाई से 16 अगस्त तक मोरहाबादी स्थित बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में खेले जाएंगे।
टूर्नामेंट में देश के शीर्ष फुटबॉल क्लबों के साथ भारतीय सेना और अन्य सर्विसेज टीमों की भागीदारी इसे और अधिक रोमांचक बनाएगी।
1888 से जुड़ा है डूरंड कप का इतिहास
डूरंड कप की शुरुआत वर्ष 1888 में शिमला के ऐतिहासिक अन्नाडेल मैदान से हुई थी। यह एशिया का सबसे पुराना और दुनिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंटों में से एक माना जाता है।
वर्ष 1940 में मोहम्मडन स्पोर्टिंग इस प्रतियोगिता का खिताब जीतने वाला पहला भारतीय क्लब बना था। वर्ष 2019 के बाद टूर्नामेंट का स्वरूप विस्तारित किया गया और इसे बहु-राज्य एवं बहु-शहर प्रतियोगिता के रूप में विकसित किया गया।
फुटबॉल प्रेमियों को मुकाबलों का इंतजार
ट्रॉफी शोकेस समारोह के साथ ही रांची में डूरंड कप-2026 की तैयारियों का औपचारिक शुभारंभ हो गया है। अब फुटबॉल प्रेमियों की निगाहें 26 जुलाई से शुरू होने वाले मुकाबलों पर टिकी हैं, जहां देश की दिग्गज टीमें प्रतिष्ठित खिताब जीतने के लिए मैदान में उतरेंगी।






