मार्च में थोक महंगाई बढ़कर 3.88% पर पहुंची, ईंधन और विनिर्माण कीमतों का असर

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच देश में महंगाई का दबाव बढ़ता दिख रहा है। खुदरा महंगाई के बाद अब थोक महंगाई दर भी लगातार पांचवें महीने बढ़कर मार्च में 3.88 फीसदी पर पहुंच गई है। फरवरी में यह 2.13 फीसदी थी।

किन कारणों से बढ़ी महंगाई

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ईंधन, बिजली और विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में उछाल के कारण हुई है।

कच्चे तेल, नेचुरल गैस, बेसिक मेटल, गैर-खाद्य वस्तुएं और अन्य विनिर्माण उत्पादों की कीमतों में वृद्धि ने महंगाई को ऊपर धकेला।

ईंधन और कच्चे तेल में बड़ा उछाल

आंकड़ों के मुताबिक, ईंधन और बिजली श्रेणी में महंगाई मार्च में 1.05 फीसदी रही, जबकि फरवरी में इसमें गिरावट दर्ज की गई थी।

कच्चे तेल की मुद्रास्फीति में बड़ा उछाल देखा गया, जो मार्च में बढ़कर 51.57 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि फरवरी में इसमें गिरावट थी।

विनिर्माण महंगाई भी बढ़ी

विनिर्मित उत्पादों की महंगाई दर फरवरी के 2.92 फीसदी से बढ़कर मार्च में 3.39 फीसदी हो गई, जिससे औद्योगिक लागत पर दबाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

खाद्य महंगाई में राहत

हालांकि, खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर मार्च में घटकर 1.90 फीसदी रह गई, जो फरवरी में 2.19 फीसदी थी। सब्जियों की कीमतों में भी नरमी आई और महंगाई दर घटकर 1.45 फीसदी रह गई।

खुदरा महंगाई भी बढ़ी

इससे पहले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई मार्च में बढ़कर 3.4 फीसदी हो गई थी, जो फरवरी में 3.21 फीसदी थी।

आरबीआई की नजर महंगाई पर

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) नीतिगत दर तय करते समय मुख्य रूप से खुदरा महंगाई को आधार मानता है। हाल ही में RBI ने अपनी मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को यथावत रखा है, लेकिन महंगाई के बढ़ते रुझान पर नजर बनाए हुए है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल और वैश्विक बाजार में अस्थिरता जारी रहती है, तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है।

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