कोलकाता, 28 अप्रैल। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में आज कोलकाता समेत सात जिलों की 142 सीटों पर मतदान शुरू हो गया है। इस चरण में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच सीधा मुकाबला देखा जा रहा है।
टीएमसी के गढ़ में भाजपा की चुनौती
पिछले चुनाव में टीएमसी ने 142 में से 123 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा 18 सीटों तक सीमित रह गई थी। इस बार भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती टीएमसी के मजबूत गढ़ में सेंध लगाना है।
‘माँ, माटी और मानुष’ बनाम नया नैरेटिव
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का ‘माँ, माटी और मानुष’ नारा एक बार फिर परीक्षा में है। वहीं भाजपा ‘घुसपैठिया’, गरीब कल्याण और सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर शहरी और सीमावर्ती क्षेत्रों में पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
भारी सुरक्षा के बीच मतदान
भारत निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए करीब ढाई लाख सुरक्षा बलों की तैनाती की है। संवेदनशील क्षेत्रों में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के साथ राष्ट्रीय जांच एजेंसी के अधिकारी भी निगरानी में लगे हैं।
‘किला बचाओ’ बनाम ‘किला भेदो’
यह चरण टीएमसी के लिए ‘किला बचाओ’ और भाजपा के लिए ‘किला भेदो’ की रणनीति का केंद्र बन गया है। भाजपा ने बूथ स्तर पर माइक्रो-मैनेजमेंट और करीबी मुकाबलों वाले क्षेत्रों पर खास फोकस किया है, जबकि टीएमसी अपने परंपरागत वोट बैंक—महिला, अल्पसंख्यक और भद्रलोक—को साधने में जुटी है।
ममता बनाम सुवेंदु का हाई-प्रोफाइल मुकाबला
सबसे चर्चित सीटों में भवानीपुर शामिल है, जहां ममता बनर्जी के सामने भाजपा ने सुवेंदु अधिकारी को उतारा है। इसके अलावा सुवेंदु नंदीग्राम से भी चुनाव लड़ रहे हैं, जहां पहले चरण में मतदान हो चुका है।
नतीजों पर टिकी नजर
इस चरण के नतीजे 4 मई को घोषित होंगे, जो राज्य की सत्ता की दिशा तय करेंगे। कांग्रेस और वामदल भले ही सीधे मुकाबले में कम दिख रहे हों, लेकिन उनका वोट शेयर चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।






