पश्चिम चंपारण की डुमरी पंचायत ने पेश की मिसाल, कचरे से बनी 1700 क्विंटल जैविक खाद, किसानों को सस्ते दाम पर उपलब्ध

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पटना, 22 अगस्त। पश्चिम चंपारण की डुमरी ग्राम पंचायत ने कचरा प्रबंधन को आय और संसाधन में बदलकर ग्रामीण स्वच्छता की नई मिसाल पेश की है। लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत पंचायत में घर-घर से एकत्र गीले और सूखे कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन से अब तक करीब 1700 क्विंटल जैविक खाद तैयार की जा चुकी है। तैयार खाद स्थानीय किसानों को कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही है। इससे किसानों को कम लागत में जैविक खाद मिल रही है, वहीं पंचायत के लिए भी आय का स्रोत तैयार हुआ है।

खाद की बिक्री से स्वच्छता व्यवस्था को मजबूती

खाद की बिक्री से प्राप्त राशि पंचायत के ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन (एसएलडब्ल्यूएम) खाते में जमा कराई जाती है। इस राशि का इस्तेमाल कचरा संग्रहण में लगे ठेला रिक्शा, पैडल रिक्शा और ई-रिक्शा की मरम्मत के साथ स्वच्छता से जुड़ी परिसंपत्तियों के रखरखाव में किया जा रहा है।

इस तरह पंचायत ने कचरे को समस्या के बजाय संसाधन में बदलते हुए स्वच्छता, जैविक खेती और स्थानीय आर्थिक आत्मनिर्भरता को एक-दूसरे से जोड़ने का प्रयास किया है।

3,430 परिवारों वाली पंचायत में बदली तस्वीर

पश्चिम चंपारण के योगापट्टी प्रखंड मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित डुमरी पंचायत में 3,430 परिवार रहते हैं। कुछ वर्ष पहले तक पंचायत में कचरा प्रबंधन बड़ी चुनौती थी। घरों, दुकानों और सार्वजनिक स्थानों से निकलने वाला कचरा जगह-जगह बिखरा रहता था, जिससे स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित होती थी।

इसी बीच स्थानीय किसान फसलों के लिए महंगे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर थे। पंचायत प्रशासन ने इस समस्या को अवसर में बदलने के लिए कचरे को व्यवस्थित तरीके से एकत्र कर उसके प्रसंस्करण की पहल शुरू की।

15 वार्डों में घर-घर कचरा संग्रहण

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत वर्ष 2023 में पंचायत में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन का काम शुरू किया गया। इसके बाद सभी 15 वार्डों में नियमित घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था लागू की गई।

कचरा संग्रहण के लिए पंचायत में 15 ठेला रिक्शा और एक बैटरी रिक्शा तैनात किए गए हैं। प्रत्येक वार्ड में एक स्वच्छता कर्मी कचरा संग्रहण करता है, जबकि पंचायत स्तर पर निगरानी के लिए स्वच्छता पर्यवेक्षक की व्यवस्था की गई है।

गीले कचरे से तैयार हो रही जैविक खाद

घर-घर से एकत्र गीले और सूखे कचरे को पंचायत की अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई (डब्ल्यूपीयू) तक पहुंचाया जाता है। यहां कचरे को अलग-अलग कर वैज्ञानिक तरीके से उसका प्रसंस्करण किया जाता है। गीले कचरे, गोबर और कृषि अपशिष्ट से जैविक खाद तैयार की जा रही है।

पश्चिम चंपारण के उप विकास आयुक्त काजले विभव नितिन ने बताया कि डुमरी ग्राम पंचायत ‘कचरे से समृद्धि’ पहल के तहत उल्लेखनीय काम कर रही है। पंचायत में नियमित रूप से घर-घर कचरा संग्रहण किया जा रहा है और अब तक करीब 1700 क्विंटल जैविक खाद तैयार की जा चुकी है।

किसानों को कम कीमत पर खाद

तैयार जैविक खाद स्थानीय किसानों को कम दरों पर उपलब्ध कराई जा रही है। इससे किसानों को कम लागत में जैविक खाद मिलने के साथ जैविक खेती को भी बढ़ावा मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर तैयार खाद के इस्तेमाल से बाजार से महंगी खाद खरीदने पर किसानों की निर्भरता कम करने में भी मदद मिल रही है।

कचरे से रोजगार और आत्मनिर्भरता

डुमरी पंचायत का मॉडल दिखाता है कि बेहतर योजना और नियमित कचरा संग्रहण के जरिए गांवों में अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है। कचरे के संग्रहण और प्रसंस्करण से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

खाद की बिक्री से प्राप्त राशि को दोबारा स्वच्छता व्यवस्था में लगाने से पंचायत के संसाधनों का पुनः उपयोग हो रहा है। इस तरह कचरा प्रबंधन से लेकर खाद तैयार करने और उसकी बिक्री तक की प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर संचालित हो रही है।

डुमरी ग्राम पंचायत ने कचरे को बोझ मानने के बजाय उसे आय और उपयोगी संसाधन में बदलने का रास्ता अपनाया है। स्वच्छता, जैविक खेती, रोजगार और पंचायत की आर्थिक आत्मनिर्भरता को जोड़ने वाली यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन का अनुकरणीय मॉडल बनकर सामने आई है।

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