रांची, 24 अगस्त । झारखंड पुलिस साइबर अपराध पर लगाम लगाने और आम लोगों को राहत देने के लिए लगातार कार्रवाई के दावे कर रही है, लेकिन सामने आए आंकड़े साइबर अपराध के मामलों के निपटारे की धीमी रफ्तार की तस्वीर पेश करते हैं। केंद्र स्तर पर वित्तीय और साइबर अपराध को लेकर हुई समीक्षा में राज्य के प्रदर्शन को लेकर कई चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं।
राज्य में साइबर अपराध से जुड़े 2,730 मामलों में महज 351 मामलों का निपटारा हुआ है। यानी मामलों के निपटारे की दर सिर्फ 12.85 प्रतिशत रही, जबकि 2,379 मामले अब भी लंबित हैं।
गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन मामलों के निपटारे की रफ्तार धीमी
झारखंड पुलिस की ओर से साइबर अपराध के खिलाफ अभियान चलाने और आरोपितों की गिरफ्तारी की जानकारी लगातार सामने आती रही है। साइबर ठगी की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई के लिए 1930 हेल्पलाइन भी संचालित है। इसके बावजूद समीक्षा में मामलों के निपटारे की दर काफी कम पाई गई।
साइबर अपराध के मामलों में अब तक 337 गिरफ्तारियां दर्ज की गई हैं। हालांकि, गिरफ्तारी के मुकाबले मामलों के निपटारे की धीमी गति पुलिस की साइबर अपराध से निपटने की क्षमता पर सवाल खड़े करती है।
ठगी की रकम रोकने में भी प्रदर्शन कमजोर
वित्तीय साइबर धोखाधड़ी के मामलों में ठगी की रकम को बैंक खाते में रोकने की कार्रवाई यानी Lien का झारखंड में औसत प्रतिशत 17.23 फीसदी रहा। वर्ष 2026 की शुरुआत में इसमें कुछ सुधार दर्ज किया गया है।
समीक्षा में CFMC में राज्य के प्रतिनिधियों की तैनाती का भी उल्लेख किया गया है। इसके जरिए बैंकिंग संस्थानों के साथ समन्वय कर ठगी की रकम को समय रहते रोकने की प्रक्रिया पर नजर रखी जाती है।
1930 हेल्पलाइन की भूमिका अहम
साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों के लिए संचालित 1930 हेल्पलाइन की भी समीक्षा की गई। इसमें पर्याप्त प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता और हेल्पलाइन के चौबीसों घंटे संचालन का उल्लेख किया गया है।
साइबर ठगी के बाद रकम तेजी से कई बैंक खातों में ट्रांसफर हो सकती है। ऐसे में शिकायत मिलने के शुरुआती घंटों में कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी वजह से 1930 हेल्पलाइन के जरिए शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई और बैंकिंग संस्थानों के साथ समन्वय को अहम माना गया है।
रांची-जामताड़ा समेत चार जिलों में म्यूल खाते बड़ी चुनौती
समीक्षा के मुताबिक रांची, धनबाद, जामताड़ा और देवघर में म्यूल बैंक खातों और संदिग्ध स्थानों की संख्या राष्ट्रीय स्तर पर अधिक दर्ज की गई है। म्यूल खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता है।
इसके अलावा राज्य के कई जिलों में ATM कैश-आउट हॉटस्पॉट भी सक्रिय पाए गए हैं। इन स्थानों पर साइबर ठगी से हासिल रकम को नकद निकालने की गतिविधियां सामने आई हैं।
IMEI और मोबाइल ब्लॉकिंग में बैकलॉग
तकनीकी कार्रवाई से जुड़े आंकड़ों में मोबाइल ब्लॉकिंग के क्षेत्र में प्रगति का उल्लेख है, लेकिन इसके बावजूद कई मामले लंबित हैं। IMEI ब्लॉकिंग में भी महत्वपूर्ण बैकलॉग दर्ज किया गया है। समीक्षा में वर्ष 2026 तक लंबित मामलों के साथ CIAR और IMEI से जुड़े मामलों को अलग-अलग दर्ज किया गया है।
49 नेटग्रिड यूजर्स, सिर्फ 26 सक्रिय
साइबर अपराध की जांच और खुफिया सूचनाओं के इस्तेमाल से जुड़े नेटग्रिड समाधान की स्थिति भी समीक्षा में सामने आई है। 13 मार्च 2026 को राज्य स्तर पर नेटग्रिड समाधान के प्रभावी इस्तेमाल को लेकर कार्यशाला आयोजित की गई थी।
झारखंड में कुल 49 नेटग्रिड यूजर्स हैं, लेकिन इनमें सिर्फ 26 सक्रिय हैं। यानी 23 यूजर्स सक्रिय नहीं हैं। समीक्षा में राज्य स्तर और गृह मंत्रालय के नेटग्रिड के साथ बेहतर समन्वय के लिए पर्याप्त वरिष्ठता वाले नोडल अधिकारी की नियुक्ति का भी उल्लेख किया गया है।
समन्वय प्लेटफॉर्म पर 109 मामले
प्रवर्तन से जुड़े आंकड़ों के अनुसार साइबर अपराध के मामलों में कुल 337 गिरफ्तारियां हुई हैं। वहीं, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय से जुड़े प्लेटफॉर्म पर 109 मामले दर्ज किए गए हैं। ये आंकड़े साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की स्थिति को दर्शाते हैं।
आंकड़े बता रहे साइबर पुलिसिंग की चुनौती
झारखंड में साइबर अपराध के 2,730 मामलों में सिर्फ 351 का निपटारा, 17.23 फीसदी Lien प्रतिशत, IMEI ब्लॉकिंग में बैकलॉग, 337 गिरफ्तारियां और 49 में से सिर्फ 26 सक्रिय नेटग्रिड यूजर्स का आंकड़ा राज्य की साइबर पुलिसिंग की मौजूदा स्थिति को सामने रखता है।
रांची, धनबाद, जामताड़ा और देवघर में म्यूल खातों तथा संदिग्ध स्थानों की मौजूदगी और कई जिलों में ATM कैश-आउट हॉटस्पॉट की सक्रियता चुनौती को और गंभीर बनाती है। आंकड़ों से संकेत मिलता है कि गिरफ्तारियों और अभियान के साथ-साथ मामलों के निपटारे, ठगी की रकम रोकने और तकनीकी संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।






