पेपर लीक और नकल पर लगेगी लगाम! बिहार सरकार ने गठित की विशेषज्ञ समिति, परीक्षा तंत्र की होगी पूरी समीक्षा; 3 महीने में सरकार को सौंपेगी रिपोर्ट

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पटना, 24 अगस्त । बिहार में पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों पर लगाम लगाने के लिए सम्राट चौधरी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने परीक्षाओं में व्यापक सुधार की अनुशंसा के लिए पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की अधिसूचना जारी कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या हाईकोर्ट के सेवारत अथवा सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित यह समिति तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी।

पांच तरह की परीक्षाएं समिति के दायरे में

विशेषज्ञ समिति राज्य में आयोजित होने वाली विभिन्न परीक्षाओं की मौजूदा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करेगी। इसके दायरे में मुख्य रूप से पांच श्रेणियों की परीक्षाएं शामिल होंगी—

  1. माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक परीक्षाएं
  2. विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं
  3. व्यावसायिक एवं तकनीकी परीक्षाएं
  4. प्रवेश एवं पात्रता परीक्षाएं
  5. भर्ती एवं प्रतियोगिता परीक्षाएं

समिति का उद्देश्य निष्पक्ष, सुरक्षित, पारदर्शी, तकनीकी रूप से सक्षम, समयबद्ध और विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था विकसित करने के लिए सरकार को ठोस सुझाव देना है।

पेपर लीक और नकल रोकने के उपायों पर जोर

समिति प्रश्न-पत्र लीक, नकल, परीक्षा केंद्रों में हेराफेरी, उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ और परिणामों में अनधिकृत हस्तक्षेप जैसी गड़बड़ियों की रोकथाम के उपायों की समीक्षा करेगी। परीक्षा प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक, डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी सुझाव दिए जाएंगे।

प्रश्न-पत्र से रिजल्ट तक पूरी प्रक्रिया की होगी समीक्षा

विशेषज्ञ समिति परीक्षा संचालन, प्रश्न-पत्र तैयार करने, मूल्यांकन, परिणाम जारी करने और शिकायत निवारण समेत पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उपाय सुझाएगी। प्रश्न-पत्र और उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षित निगरानी के लिए चेन ऑफ कस्टडी प्रोटोकॉल विकसित करने पर भी विचार किया जाएगा।

परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था, अभ्यर्थियों की पहचान, बायोमेट्रिक सत्यापन और सीसीटीवी निगरानी को मजबूत करने की सिफारिश की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर परीक्षाओं की जांच और ऑडिट की व्यवस्था पर भी समिति सुझाव देगी।

राज्य परीक्षा कैलेंडर की हो सकती है सिफारिश

परीक्षाओं, मूल्यांकन और परिणाम जारी करने में होने वाली देरी के कारणों की भी समिति समीक्षा करेगी। इसके साथ ही राज्य के लिए एक समेकित परीक्षा कैलेंडर तैयार करने की अनुशंसा की जा सकती है।

इसमें विज्ञापन जारी करने, आवेदन लेने, प्रवेश-पत्र जारी करने, परीक्षा आयोजन, प्रोविजनल उत्तर कुंजी जारी करने, आपत्तियों के निपटारे, अंतिम उत्तर कुंजी, मूल्यांकन और परिणाम की घोषणा तक प्रत्येक चरण के लिए अधिकतम समय-सीमा तय करने का प्रावधान हो सकता है।

प्रश्न-पत्र तैयार करने की व्यवस्था भी बदलेगी

प्रश्न-पत्र निर्माण की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए बहु-स्तरीय प्रश्न-पत्र सेटिंग, मॉडरेशन, प्रशिक्षित एवं सूचीबद्ध प्रश्न-पत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों और कठिनाई स्तर के मानकीकरण जैसी व्यवस्थाओं पर सुझाव दिए जाएंगे।

इसके अलावा प्रश्न-पत्र की सेटिंग, सुरक्षित भंडारण, परिवहन, वितरण, डिजिटल ट्रांसमिशन और अभिगम नियंत्रण की भी समीक्षा की जाएगी।

डिजिटल ट्रैकिंग से साइबर सुरक्षा तक

समिति परीक्षा सामग्री की एंड-टू-एंड डिजिटल ट्रैकिंग, छेड़छाड़-रोधी पैकेजिंग, एन्क्रिप्टेड ट्रांसमिशन और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसे उपायों की व्यवहार्यता की जांच करेगी। इसके साथ ही बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, जियो-टैगिंग, जियो-फेंसिंग और साइबर सुरक्षा ऑडिट को परीक्षा व्यवस्था में शामिल करने की संभावनाओं पर भी विचार होगा।

सरकार का लक्ष्य परीक्षा प्रक्रिया को इस तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है, जिससे पेपर लीक, नकल और अन्य अनियमितताओं पर प्रभावी ढंग से रोक लगाई जा सके और अभ्यर्थियों का परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हो।

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