भागलपुर के खरीक में गंगा का कहर, राघोपुर-शंकरपुर बांध ध्वस्त होने से मचा हड़कंप; 25 हजार आबादी और करोड़ों की फसल पर मंडराया संकट

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भागलपुर, 24 अगस्त । जिले के नवगछिया अनुमंडल अंतर्गत खरीक प्रखंड के दक्षिणी क्षेत्र में बाढ़ का भीषण खतरा पैदा हो गया है। रविवार देर रात गंगा नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि और तेज बहाव के कारण राघोपुर-शंकरपुर (काजीकोरैया) मुख्य जमींदारी बांध का करीब 200 मीटर हिस्सा ध्वस्त होकर गंगा की धारा में समा गया। तटबंध टूटने के बाद गंगा का पानी तेजी से रिहायशी और कृषि इलाकों की ओर बढ़ रहा है।

200 मीटर तटबंध गंगा में समाया

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गंगा के तेज कटाव के कारण देखते ही देखते तटबंध का बड़ा हिस्सा नदी में विलीन हो गया। कटाव इतना भीषण था कि जल संसाधन विभाग के कैंप कार्यालय का करीब आधा हिस्सा भी नदी की धारा में समा गया। घटना के बाद आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई।

25 हजार से अधिक आबादी पर खतरा

तटबंध टूटने से खरीक प्रखंड की राघोपुर, लोकमानपुर, उस्मानपुर और तुलसीपुर समेत कई निचली पंचायतों के गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। पानी की रफ्तार इसी तरह बनी रही तो क्षेत्र की 25 हजार से अधिक आबादी प्रभावित हो सकती है। ग्रामीणों में वर्ष 2008 की प्रलयंकारी बाढ़ जैसी तबाही की आशंका को लेकर भय का माहौल है।

सामान और मवेशियों के साथ पलायन

बाढ़ के खतरे को देखते हुए ग्रामीणों ने ऊंचे स्थानों और राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर पलायन शुरू कर दिया है। लोग अपने साथ अनाज, मवेशी और जरूरी सामान लेकर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में निकल रहे हैं। अचानक आई इस आपदा ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।

केले समेत कई फसलों पर संकट

नवगछिया और खरीक क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाने वाली केले की सैकड़ों एकड़ फसल पानी में डूबने की कगार पर है। इसके अलावा धान, मक्का और हरी सब्जियों की फसल भी प्रभावित होने की आशंका है। किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

फ्लड फाइटिंग टीम ने संभाला मोर्चा

घटना की सूचना मिलते ही जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता, कार्यपालक अभियंता और फ्लड फाइटिंग टीम के अध्यक्ष मौके पर पहुंचे और कैंप कर स्थिति पर नजर रख रहे हैं। बांध के शेष हिस्से को बचाने और पानी की तेज धारा को नियंत्रित करने के लिए सैकड़ों मजदूरों को लगाया गया है।

बचाव कार्य के तहत एनसी बैग (बालू भरी बोरियां) और पेड़ों की बड़ी टहनियां नदी में डाली जा रही हैं, ताकि धारा की दिशा को मोड़ा जा सके और कटाव को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

प्रशासन ने संभाली स्थिति

खरीक के अंचलाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि प्रशासन जान-माल की सुरक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। हालांकि, गंगा की तेज धारा और लगातार हो रहे कटाव के कारण ग्रामीणों में अब भी दहशत बनी हुई है।

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